Sunday, January 8, 2017

कक्षा से नये शब्दों की शुरुआत

                                                   कक्षा से नये शब्दों की शुरुआत 
 by Ekta
हम सभी अपने आसपास की चीजों को निरंतर देखते रहते हैं, बहुत कुछ सीखते हैं | जैसे:- कोई प्रकृति प्रेमी कभी अकेला नहीं होता, वो प्रकृति से ही प्रभावित होता है और उसी से प्रोत्साहित भी | बस देखने का नजरिया है कि कौन कहाँ से, कैसे सीख रहा है |
अगर हम अपने पाठ्य पुस्तक पर गौर करें तो उसका निर्माण भी कुछ इसी तरह है | हमारी पुस्तकें भी हमारे आसपास के ज्ञान का सार है |
मैंने भी मेरी कक्षा का अगला चरण इसी को ध्यान में रखते हुए शुरू किया | मैंने कक्षा में मौजूद 11  वस्तुओं का अंग्रेजी नाम बच्चियों से बात करते-करते कागज के टुकड़ों में लिखना शुरू कर दिया | हमारे बातचीत के केंद्र बिंदु भी यही वस्तुएं थें | इस दौरान मैंने बच्चों से कुछ सवाल किये| जैसे- अच्छा बताओ इस कक्षा में क्या-क्या दिखाई दे रहा है? जवाब आया कुर्सी, बोर्ड, मार्कर, पेन, कॉपी, बुक, फेन, शांति का कपड़ा, खिड़की आदि | फिर मैंने पूछा क्या किसी को इस रूम में दरवाजा दिख रहा है क्या? सभी ने बोला हाँ दीदी! दरवाजा भी है | फिर मैंने पूछा अच्छा बताओ दरवाजे को अंग्रेजी में क्या बोलते है? जिसको पता हो बस वो अपना हाथ उठाए | मैंने देखा 35 लड़कियों में मात्र 2 ने अपना हाथ खड़ा किया | जब मैंने एक से बोलने को कहा तो बोली दीदी ठीक से याद तो नहीं है D से शब्द शुरू होता है शायद | दूसरे ने “दूर-दूर” कहा | फिर मैंने कहा आज हमलोग इन्ही सब का अंग्रेजी नाम सीखेंगे |
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मैंने कक्षा आरंभ की और पुर्जे में मौजूद सबसे छोटा शब्द pen निकला और बच्चों को दिखाया | केवल 5 बच्चिओं को छोड़कर बाकि सब ने इसको देखते ही इस शब्द से परिचित होने के समर्थन में हाथ उठाया| फिर मैंने सीमा से पूछा बताओ ये क्या लिखा है? सीमा ने इसका उच्चारण सही-सही किया | फिर मैंने इससे मिलता-जुलता शब्द fan उठाया और सभी को दिखाया | फिर उन 5 बच्चियों ने अपना हाथ नहीं उठाया | इस बार मैंने बरती से इसका उच्चारण करने बोला | उसने इसका उच्चारण ठीक-ठीक किया मगर इस शब्द के पहले अक्षर पर विशेष जोड़ दिया इससे इस शब्द की सुन्दरता थोड़ी फीकी पर गयी | फिर मैंने रानी से इसका उच्चारण करने को बोला और उसने सही-सही उच्चारण किया | फिर बरती ने रानी के साथ इसका उच्चारण करने का अभ्यास किया | इस बीच सभी बच्चियां रानी के साथ धीमे स्वर में इसके उच्चारण का अभ्यास कर रहीं थीं | फिर धीरे-धीरे हमारा अभ्यास बढ़ता चला गया, शब्द से परिचित होने के सन्दर्भ में उठने वाले हाथों की संख्या घटती चली गयी | उन 5 बच्चियों ने आखरी तक अपना हाथ नहीं ही उठाया | इसका मुख्य कारण ये था कि इन्हें अक्षर जोड़कर शब्द बनाने अभी कठिनाई महसूस होती है | फिर एक शब्द ऐसा आया जिसमे किसी ने हाथ नहीं उठाया | वो शब्द था chalk | फिर जब मैंने बताया ये चाक लिखा हुआ है तो उनमे से किसी ने कोई सवाल नहीं किया और मान लिया की ये चाक लिखा हुआ है | फिर मैंने ही पूछा लेकिन ये चाक कैसे हो सकता है इसमें तो L लिखा हुआ है इसको हमलोग पढ़ ही नहीं रहे है| सभी ने फिर आश्चर्य से मेरी ओर देखा | मैंने कोई जवाब नहीं दिया और बोर्ड पर walk लिख दिया जिसे काजल और रानी ने सही-सही पढ़ लिया | फिर मैंने talk लिखा | जिसे लगभग सभी ने पढ़ लिया | दो शब्द और भी बाकि थे इस लिए मैंने ज्यादा उदाहरण नहीं दिया और बोला इन शब्दों में हम बोलते समय L का उच्चारण नहीं करते, पर लिखते जरुर हैं | अंग्रेजी भाषा में कुछ शब्दों की संरचना इसी प्रकार की गयी है | अगला शब्द था teacher | इसमें 15 लड़कियों ने हाथ उठाया | मैंने इस बार उनमे से किसी को बोलने के लिए नहीं कहा | इस बार मैंने बुधनी को बोलने को कहा जिसने अपना हाथ नहीं उठाया था | बुधनी ने कहा “दीदी हम अपना हाथ नहीं उठाए थे |” फिर मैंने कहा मुझे मालूम है की तुमने अपना हाथ नहीं उठाया था पर मुझे यकीन है की तुम इसको पढ़ सकती हो | उसने अक्षरों को पढ़ना शुरू किया और मन में जोड़ते-जोड़ते उसने टीचर बोला | इससे उसे भी बड़ी ख़ुशी महसूस हुई | उस समय उसकी ख़ुशी में आत्मविश्वास झलक रहा था जिसे उसने वहीँ और बाकी लोगो ने अगली कक्षा में महसूस किया | अंततः ये शब्द सभी के हाथों तक गये और अभी ने इसको दिखाकर इसका उच्चारण किया |
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समूह कार्य: सभी लड्कियों को 5-6 के समूह में बाँटा गया| इस समूह में सभी लड़कियां बारी-बारी से सभी अंग्रेजी के शब्द दोहरा रही थी जिसे उन्होंने आज सीखा था | इन शब्दों से समूह के सभी सदस्यों ने अपने-अपने समूह के लिए 2-2 वाक्य बनायें और पूरी कक्षा में सुनाएँ | इस अभ्यास को करने का मुख्य उद्देश्य यह था कि सभी लड़कियां इन शब्दों को अधिक से अधिक सुन सके और उनको सुनते-सुनते याद हो जाये |  
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उस दिन मैंने बस इन शब्दों को बार-बार बच्चों को दिखाया, बुलवाया, शब्द के साथ चित्र बनाया और बच्चों से भी बनवाया |
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कक्षा के अंत में सभी समूहों से अपने समूह की ही लड्कियों के साथ इस कार्य को दोहराने के लिए कहा गया और बताया गया कि अगले दिन यही लोग आपके समूह के सदस्य होंगे | अतः सभी लोग अपने समूह के सभी लोग पर ध्यान देंगे |
अगले दिन कक्षा के प्रारंभ में ही मैंने सभी लड़कियों को पांच-पांच के समूह में बाँट दिया, जिसमे उन सभी को अपनी यादास्त से पिछली कक्षा में सीखे गए हुए अंग्रेजी शब्द को अपनी-अपनी कॉपी में लिखना था, जिसमे कोई किसी की मदद नहीं कर सकते | यह वही समूह था जो पिछली कक्षा में बनाया गया था | 5 मिनट के बाद सभी समूह से आवाज आने लगा दीदी हमारा हो गया | इस अभ्यास में एक समूह को दुसरे समूह के हर लड़की की कॉपी आपस में बाँट कर जाँच करनी थी और उन्हें नंबर देना था| इस अभ्यास में सभी लड़कियां एक-दुसरे की कॉपी जाँच कर रही थी | जिस लड़की को जाँच करने में समस्या हो रही थी वह अपने समूह के दूसरी लड़की की मदद ले रही थी |
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परिणाम: अंत में सभी को उनकी कॉपी वापस की गयी और जिसमे 2 लड़कियों ने बोला “दीदी मैंने सही लिखा था उसने गलत कर दिया |” जब मैंने कॉपी देखा तो पाया एक ने साफ-साफ नहीं लिखा था इसलिए जांचकर्ता ने उसके नंबर काट लिए और दूसरी कॉपी में दो सही शब्दों को वाकई गलत कर दिया गया था | इस जांचकर्ता ने मान लिया की दीदी मैंने कल अभ्यास नहीं किया था | मुझे शब्द लिखना नहीं आता | इसके साथ-साथ ये भी पता चला की कल लगातार हाथ न उठाने वाली 5 बच्चियों में से 2 ने अपना काम पूरा कर लिया है, उन्हें इन 11 शब्दों को लिखने में कोई परेशानी नहीं है | और बांकी के 3 लोगों ने भी अपना पन्ना खाली नहीं छोड़ा बल्कि 1-2 शब्द तो लिख ही दिया था |
दूसरे अभ्यास में मैंने प्रत्येक समूह से ऐसी दो लड़कियों का चुनाव किया जिन्होंने पिछली सभी क्रियाकलाप में बहुत कम हिस्सा लिया | बारी-बारी से प्रत्येक समूह से दो लड़कियां उठ रही थीं और सामने आ रहीं थी | इसमें एक ऐसी लड़की जो लिख सकती थी उसे मैंने बोर्ड पर लिखने के लिए आमंत्रित किया और दूसरी जो गलत ही सही पर शब्दों को देखकर पढ़ सकती थी उन्हें बोर्ड से थोड़ी दूर कार्ड उठाकर बोलने के लिए बुलाया | इस अभ्यास में दूसरी लड़की को बारी-बारी से कार्ड उठाकर शब्द बोलना था और उसके साथी को लिखना था |
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परिणाम: इस अभ्यास के दौरान जब पहले समूह से पूछा गया की लिखने के लिए कौन आना चाहता है तो बुधनी ने झट से हाथ खड़ा किया और बोला “ दीदी मैं लिखना चाहती हूँ ”| बुधनी ने पहली बार किसी चीज में इतनी उत्सुकता दिखाई थी जिसे देखकर हम सभी दंग रह गए और मुझे बहुत ख़ुशी महसूस हुई | बुधनी बोर्ड पर लिखने आयी | जैसे उसकी साथी शब्द बोलती वो बिना रुके लिख देती | उसकी साथी को window पढने में दिक्कत हो रही थी पर उसने सुना और समझ बनाया की यह window बोलना चाह रही है |
दूसरे समूह से पढने वाली बच्ची को 1-2 शब्दों को पढने में दिक्कत महसूस हो रही थी पर उसने अपनी साथी का पूर्ण सहयोग किया | लिखने वाली बच्ची अगर लिखने में रुक जाती तो वो उसे अपनी ओर देखने के लिए बोलती |
तीसरे समूह में पढने वाले को भी थोड़ी दिक्कत महसूस हो रही थी और लिखने वाले को भी |शायद वो बोर्ड पर आकर घबरा गयी थी | उसके सहयोगी के द्वारा शब्द दिखाये जाने के बावजूद वो शब्दों को  गलत लिख रही थी पर उसके साथी ने उसका खूब साथ दिया और अधिकांश शब्द सही लिखवायें|
चौथे समूह में लिखने और पढने वाली दोनों ही लड़कियों ने अपना काम जल्दी-जल्दी कर लिया | एक शब्द को देखकर बोलती चली गई और दूसरी बिना पीछे देखे लिखते चली गई |
मैंने कक्षा को फिर से समूह अभ्यास में बाँट दिया जिसमे सभी को अपने सामने वाले को उस वस्तु की ओर इशारा करके उसका अंग्रेजी में नाम पूछना था | 2 लड़कियों को छोड़कर सभी ने इस अभ्यास का  पूरा आनंद लिया | जैसे मानो वो आपस में खेल रही हों |
मैंने कक्षा को यहीं रोका और अगले दिन के लिए सभी को अपनी-अपनी तैयारी खुद से करने को कहा |
अगले दिन जब मैं गयी तो मैंने बारी-बारी से 6-8 लड्कियों को बुलाया और बोर्ड पर उन्ही शब्दों को लिखने को कहा | जब एक लड़की लिख लेती थी तो 3-4 लड़कियां इसको चेक करने आती थी की इसने सही लिखा है या गलत | इस प्रक्रिया में सभी लड़कियां बारी-बारी से बोर्ड पर आयी |
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परिणाम: यह अभ्यास मेरे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ | मैंने कम समय में सभी लड़कियों को जान लिया कि किसे कहाँ दिक्कत हो रही है, कैसी दिक्कत हो रही है, किसने अच्छा प्रयास किया और किसने प्रयास करने में कमी की | उन दो लड़कियां जिन्होंने अपना हाथ शुरू से नहीं उठाया अंततः उन्होंने भी 6-7 शब्द बोलना सीख ही लिया चाहे वे न लिख पायें |

Tuesday, December 20, 2016

Class observation Jangal mein Sabha


जंगल में सभा
by: Ekta
    जंगल में सभा, हमने हमारी कक्षा 6 के लिए इस कविता का चयन कक्षा 3 की हिंदी पाठ्य पुस्तक से की है| इस कहानी को हमने अपनी कक्षा में इसलिए शामिल किया ताकि हम हमारी बच्चियों की कल्पना शक्ति का विकास कर सकें | यह कहानी आपने आप में अधूरी है | हमें ऐसा लगा की हम एक छोटी-सी घटना देकर बच्चों को आगे सोचने के लिए प्रेरित कर सकते हैं | यह अभ्यास हमारे लिए भी उतना ही उपयोगी था क्योंकि सभी बच्चों की अलग-अलग कल्पना शक्ति होती है | इसके सहायता से हम जान सकते थे कि एक घटना पर हमारे बच्चे क्या-क्या कल्पना कर सकते है, उनकी प्रतिक्रियां कैसे-कैसे आ सकते हैं| यह अभ्यास हमें हमारे बच्चों को समझने में हमारी मदद करता |
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क्रियाकलाप:
हमलोगों ने इसके लिए अपने अभ्यास को दो चरणों में बांटा |
पहले में हमने कहानी रोचक ढंग से पढ़कर सुनाई और उनसे कहानी बनवाई |
इससे हमने इस प्रकार किया:-  हमने उन्हें बताया कि आज हम एक कहानी पढने जा रहे हैं, जिसका शीर्षक है जंगल में सभा  | फिर इसके मुख्य पात्र हाथी, शेर, लोमड़ी, सियार, भालू, बंदर, हिरण, खरगोश और अजगर को उजागर किया | नाम बताने  के बाद हमने उन्हें 2 मिनट का समय दिया और पूछा की आप इन पात्रो को जानने के बाद इससे अंदाजा लगा सकते है की कहानी क्या होगी? उनसे कोई जबाब न आने पर हमने कहानी को पढ़कर सुनाया | अधूरी कहानी बताने के बाद हमने उनसे कुछ सवाल पूछे ताकि उनको आगे सोचने में आसानी हो | हमने पूछा कि जंगले में सभा कहाँ बुलाई गयी, चांदनी ने बताया कि मैदान में | इसपर हमने उनसे पूछा जंगल में तो मैदान होता नहीं है? तभी नेहा ने तुरंत से बोला “सभा पेड़ के नीचे बुलाई गयी |” तब हमने कहा “बहुत अच्छा”, सभा पेड़ के नीचे ही बुलाई गयी |
आगे हमने सभी से ये जानने की कोशिश की कि आगे क्या हुआ होगा? इसके लिए हमने उन्हें समूह में बाँट दिया | इस कक्षा में उपस्थित लड़कियों की कुल संख्या 31 थी  | हमने सभी को 5-6  के समूह में बाँट दिया | समूह में बाँटने के लिए हमने सभी से 1 से 5 तक की गिनती करायी | 1 बोलने वाली सभी लड़कियों को समूह (1), 2 बोलने वाली सभी लड़कियों को समूह (2), 3 बोलने वाली सभी लड़कियों को समूह (3), 4 बोलने वाली सभी लड़कियों को समूह(4) और 5 बोलने वाली सभी लड़कियों को समूह (5) में रखा गया | इस कहानी में सभा तो बुलाई गयी, पर किस बात पर चर्चा हुई इस बात का इस अभ्यास में कहीं कोई चर्चा नहीं था | हमने उनसे कहा कि अब आप सभी अपने समूह में सोचिये और चर्चा कीजिये कि किस बात पर चर्चा हो सकती है | अपने समूह में सभी लड़कियां अपना-अपना तर्क  दे रही थी | समय पूरा होने के बाद हमने समूह से जानने का प्रयास किया | इसके लिए हमने समूह (1) से कहा, आपलोग के हिसाब से किस बात पर चर्चा हुई होगी? इसके लिए समूह (1) के सभी लड़कियों ने ज्योति से कहा तुम सुनाओ | ज्योति ने अपने समूह द्वारा बनायीं गयी कहानी को पढ़ना शुरू किया |  इनके कहानी में सभा बुलाने का मुख्य कारण शिकारी का जंगल में घुस आना था, जिससे जंगले के जानवरों की संख्या लगातार कम हो रही थी | समूह (2) से गीता ने सभा बुलाने का मुख्य कारण जंगल में प्रदुषण का फैल जाना था | हमें ये जानकर बहुत ख़ुशी हुई कि सभी ने अपने समूह में बढ़-चढ़कर भाग लिया | समय समाप्त होने के कारण हम सभी की कहानी पर चर्चा नहीं कर पाए | हमने जाते-जाते सभी को गृहकार्य दिया कि सभी लोग अपने समूह में इस कहानी को और बेहतर बनाने का प्रयास करें | कोशिश करें कहानी 4-5 वाक्यों से अधिक हो |
दूसरे दिन के अभ्यास में हर समूह से एक लड़की ने आकर अपनी कहानी को पूरी कक्षा को सुनाया | हमने सभी से हर किसी की कहानी पर चर्चा किया और पूछा   कि कहानी कैसी लगी? इस कहानी में और कुछ जोड़ सकते हैं क्या? अच्छी बात यह रही की सभी ने, सभी समूह की कहानी को ध्यान से सुना | सभी ने बताया की इस कहानी में कौन-सी बात उनको ज्यादा अच्छी लगी |
इस कहानी के मुख्य पात्र जानवर थे, तो हमने सोचा क्यों न जंगली और पालतू जानवर पर थोड़ी बात हो जाए | हमने बच्चियों से कहा, चलो अब ये बताओ कि इनमे से कौन-कौन-से जानवर जंगली हैं और कौन-कौन-से जानवर पालतू है? इसपर चुन्नी और आरती ने कहा कि दीदी मुझे नहीं पता की जंगली और पालतू जानवर किसे कहते है | इसपर मैंने उसे कुछ उदाहरण देकर समझाया और फिर उनसे तुरंत सवाल किया तो उन्होंने इसका सही-सही जवाब दिया | इसके बाद हम पालतू और जंगली जानवरों का सम्मिलित नाम लेना शुरू किया और एक-एक करके सभी से पूछना शुरू किया | हमने पाया की सभी लड़कियों ने सही-सही जवाब दिया | अगर इस अभ्यास के परिणाम की बात करें तो 100% लड़कियां उत्तीर्ण हुई |
निष्कर्ष – इस दो दिन के सेशन में हमने पाया कि सभी लड़कियां कहानी को बनाने में एक-दूसरे को मदद कर रही थी | सभी ने बहुत ही रोचक कहानी सोचा जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते थे कि हमारी बच्चियों का ध्यान इस बिन्दुओं पर भी जा सकता था | हमें ये विश्वास हो गया की हमारी सभी बच्चियां बेहतरीन कहानियां बना सकतीं हैं |   
Session By:  Nalini & Nikita






Thursday, December 15, 2016

Observations of a class on Command Conversation, by Ekta

                                                          खेल-खेल में क्रिया सीखें  
                                                                                   Session-4 -
By: Ekta

नाम, कक्षा एवं आसपास में दिखने वाली वस्तुओं (जिनका इस्तेमाल वे प्रतिदिन करतीं हैं अथवा देखती हैं) के बाद हमारा अगला अभ्यास उन शब्दों पर आधारित रहा जो क्रिया से संबंधित है I मेरी समझ से क्रिया शब्दों का शायद ही अंत हो, इसलिए मैंने शुरुआत में उन 13 शब्दों का चयन किया जिसका इस्तेमाल हम रोज करते हैं और जिसको समझने में मेरी बच्चियों को आसानी हो जैसे- read, write, walk, run, jump, sleep, laugh, go, come, bath, eat, sing, dance .
इस अभ्यास को करने के लिए मैंने सबसे पहले इन शब्दों को कार्ड में लिखा ताकि मुझे दिखाने और समझाने में आसानी हो I  जब मैं कस्तूरबा पहुंची तो मैंने देखा कुछ बच्चियां खाना खाने के बाद हाथ धो रही थी, कुछ अपने कमरे में अपना-अपना काम कर रही थी तो कुछ कपड़े धो रहीं थी I लगभग 5 मिनट के अन्दर नीलम और करिश्मा को छोड़कर सभी लड़कियां कक्षा में आ गयीं I करिश्मा दौड़ते हुए कक्षा में आयी और पूछी “ May I come in, Didi? “ मेरे “Please, come in.” बोलते ही नीलम भी पीछे से आ गई I क्योंकि हमारे कक्षा में सभी के द्वारा बनाये गए कुछ नियमों में से एक नियम यह है कि मेरे आने के बाद 5 से 7 मिनट के अन्दर सभी को कक्षा में आ जाना है नहीं तो समूह के लोग उनको कुछ सजा सुना सकते हैंI हमने यह नियम इसलिए बनाया क्योंकि हमारी कक्षा तब तक शुरू नहीं होती थी जब तक सभी लड़कियां आ न जाएँ I हर किसी के आने के इंतजार में हमारी कक्षा 15 से 20 मिनट विलंब से शुरू होती थी I हालांकि आजतक किसी को कोई सजा नहीं मिली पर कारण पूछकर और अगली बार जल्दी आने बोलकर छोड़ दिया जाता है I इसी नियम के अनुसार विलंब होने पर करिश्मा ने हमें विलंब का कारण बताया दीदी मेरी कॉपी नहीं मिल रही थी इसलिए मुझे आने में समय लगा I” वहीँ नीलम ने कहा दीदी मैं कपड़े धो रही थी इसलिए थोड़ा late हो गया I”
सभी लड़कियां व्यवस्थित होकर बैठ गयीं I फिर मैंने सब से पूछा, अच्छा बताओ आज आपलोगों ने कौन-कौन-सा काम किया? सभी ने एक के बाद एक बोलना शुरू किया आज हमलोग व्यायाम किये, पढ़े, खाना खाए, नहाये फिर स्कूल गए, वहां भी पढ़े, फिर खेले, छुट्टी हुआ फिर कस्तूरबा आये, खाना खाए, कपड़े धोये, उसको सूखने दिए, रूम में झारू लगायें, फिर आप आयें तो हमलोग अब पढ़ने बैठ गए I ” फिर मैंने पूछा आपलोग रोज इतना काम करते हैं?” इसपर आरती ने कहा, “हाँ, हमलोग ये सब रोज करते हैं I कभी-कभी कुछ काम कभी करते हैं और कभी नहीं करते हैं I फिर मैंने पूछा आप कौन-सा काम रोज करते है? सब ने बोला, “खाना, पीना, लिखना, पढ़ना, नहाना, स्कूल जाना, सोना, जागना...यही सब I” मैंने बोला, “बहुत अच्छे! आज हमलोग इन्हीं काम वाले शब्दों का English में नाम जानेंगे I”
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इसके लिए मैंने सबसे पहले अपने कार्ड में से eat शब्द का चयन किया, क्योंकि इस action word को बच्चियां बिना देर किये बस action देखकर तुरंत समझ सकती थी I मैंने उनकी तरफ कार्ड दिखाया जिसमें eat लिखा हुआ था | मैंने सभी से पहले ही बोल रखा था की जो इन शब्दों को पहचानते हो वे बिना बोले बस अपना हाथ खड़ा करें I मेरे कहे अनुसार सभी ने ऐसा ही किया I 34 लड़कियों में से 26 लड़कियों ने अपने हाथ खड़े किये I इन 26 लड़कियों में से मैंने बरती से पूछा, अच्छा बताओ ये क्या लिखा है? बरती ने जवाव दिया इएट I फिर मैंने स्वीटी से पूछा, उसने इसका सही उच्चारण किया I फिर मैंने इस शब्द को दोहराया और मेरे पीछे सभी बच्चियों ने भी इसे दोहराया | ऐसा हमने 4 बार किया और फिर बरती से पूछा बताओ ये क्या लिखा है?  बरती ने इस बार सही-सही उच्चारण किया I फिर मैंने बोला इसे करके दिखाओ | तो इसपर बरती ने हँसते हुए सब को खाने की एक्टिंग करके दिखाई I इसके बाद मैंने sleep का कार्ड निकला I सब की ओर कार्ड दिखाया I इस बार मात्र 7 लड़कियों ने अपना हाथ उठाया I इस बार मैंने बेबी से पूछा बताओ ये क्या लिखा है? बेबी ने सही-सही इसका उच्चारण किया और फिर कक्षा के सामने एक्टिंग करके दिखाया I इसके एक्टिंग करते ही सभी के समझ में आ गया की sleep का मतलब क्या होता है I फिर मैंने sleep बोला और एक-साथ सभी ने सोने की एक्टिंग की I Run वाले कार्ड में 30 लड़कियों ने हाथ उठाया, जिसमे से रिंकी इसे रुन पढ़ रही थी I उसको तुरंत सही करते हुए उसकी बहन परमिला ने बताया ये रन लिखा हुआ है I फिर मैंने सभी से पूछा क्या परमिला सही बोल रही है ? हाथ उठाने वालो में से केवल 3 को परमिला पर संदेह था, बांकी सभी ने बोला “yes, didi...” I इसके बाद उसने दौड़कर सबको समझाया कि इसका मतलब क्या होता है I हमारा अभ्यास इसी तरह एक-एक करके सभी शब्दों तक गया I Walk को लगभग सभी लड़कियों ने सही-सही पढ़ा क्योंकि पिछले अभ्यास में chalk को समझाने वक्त इसका उदाहरण दिया गया था | मेरे कार्ड का आखरी शब्द था laugh, इस शब्द में किसी ने हाथ नहीं उठाया I फिर मैंने हँसना शुरू किया हा.हा.हा. I किसी को बिना अजीब लगे सभी को समझ में आ गया की इसका मतलब क्या होता है I फिर रानी ने पूछा दीदी इसको पढ़ते कैसे हैं?” इसपर मैंने बताया ये लाफ लिखा हुआ है I सभी चुपचाप बस कार्ड देख रही थी I किसी ने सवाल नहीं किया पर उनलोग को देखकर समझ आ रहा था कि उनके मन में सवाल चल रहा है आखिर ये लाफ कैसे हो गया I मैंने तुरंत बताया अंग्रेजी में कुछ शब्दों को पढ़ने का कुछ खास तरीका होता है, कुछ खास आवाज होती हैं I”
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निष्कर्ष:
इस अभ्यास में 3 लड़कियां ऐसी रहीं जिन्होंने किसी भी शब्द में अपना हाथ नहीं उठाया I  अगर मजा की बात की जाये तो, सभी को 3 शब्दों पर ज्यादा मजा आया, dance, sing और bath I सभी ने इन शब्दों के एक्टिंग करते समय पूरा मजा किया I dance, 5 लड़कियों ने किया I जैसे ही कोई एक किसी का नाम लेती वो थोड़ा dance करते ही बैठने से पहले अपनी दोस्त का नाम लेती, “दीदी ये भी dance करती है आप इसको भी बोलिए I” dance करने में सभी को शर्म आ रही थी पर सभी ने enjoy किया I Sing का कार्ड देखते ही सभी ने रानी से एक गाना गाने को कहा I रानी ने आशिकी फिल्म का गाना क्योंकि तुम ही हो... का एक मुखरा गाया I
इस अभ्यास के बाद मैंने बोर्ड का सभी action words को capital letter में लिखा क्योंकि मेरी 2-3 बच्चियों को small letters का ज्ञान नहीं था I इसके साथ ही मैंने सभी शब्दों के बगल में उसको चित्र बनाकर समझाने का प्रयास किया I  मैंने लड़कियों से भी इन शब्दों पर चित्र बनाने को कहा और कक्षा समाप्त हुई I
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अगले दिन जब मैं कक्षा में गयी तो सभी बहुत खुश थी I उनके ख़ुशी का कारण उनके द्वारा action words पर  बनाया गया चित्र था I मैंने जब उनके चित्रों को देखा तो काफी दंग रह गयी I सभी ने बहुत ही खूबसूरती से उन action words को चित्र का रूप दिया था I सभी खुश थी क्योंकि उनको पता था उन्होंने बेहतर काम किया है I
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इस अभ्यास को आगे बढ़ाते हुए मैंने फिर से इन्ही सब शब्दों के साथ खेलना शुरू किया I इस बार मैंने इन शब्दों के साथ उन command conversations का भी इस्तेमाल किया जिसका प्रयोग हम अपनी कक्षा में करते हैं I जैसे- मैंने सभी को jump का कार्ड दिखाया, फिर मैंने बोला Sangeeta, stand up. Come here. Take it and jump. Go there. Sit down please. इन शब्दों को मैंने 2 बार से अधिक दोहराया ताकि सभी को समझ में आ सके की मैं क्या बोलना चाह रही हूँ I
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शुरुआत में 2 बच्चिओं को Take it समझने में दिक्कत हो रही थी I उन्होंने 30-35 सेकेंड तक बस  मेरी ओर देखा I मैंने अपने शब्दों को दोहराते हुए उनकी ओर card को बढ़ाया I मेरे card बढ़ाने पर उन्होंने card मेरे हाथ से ले लिया I फिर मैंने उसके हाथ से card ले लिया फिर Take it बोला I इस बार उन्हें समझ आ गया की मैं क्या बोलना चाह रही हूँ I    
इस अभ्यास में सभी 12 cards एक-एक करके 12 लड़कियों के हाथ में चले गए I अब इन cards को ये लड़कियां उन लड़कियों को दिखाकर action words और command conversations के साथ instructions देती थीं, जिनके हाथ में कार्ड नहीं था I ऐसा करके सभी लड़कियों के हाथ में card गया और उन सभी ने अपने दोस्तों को action words और command conversations के साथ instructions दिया I
                                               
निष्कर्ष:  
इस अभ्यास में कुछ बच्चियों को command conversations का इस्तेमाल करने और उनको बोलने में दिक्कत हो रही थी पर उन्होंने इन शब्दों को इतनी बार सुना और बोला की अंत तक 3-4 लड़कियों को छोड़कर सभी ने अभ्यास में प्रयुक्त होने वाले सभी शब्दों को सही-सही उच्चारण करना सीख लिया I अगर शब्दों को लिखने की बात की जाये तो 34 लड़कियों (जो इन अभ्यास में उपस्थित थीं) में से 22-25 लड़कियां बिना गलती किये इन शब्दों को सही-सही लिख सकतीं हैं I