Saturday, December 3, 2016

Observations at a training session, by Ekta


                                                                   
i-Saksham  follows the practice of one trainer being observed by another while imparting training. This is followed by a fact based feedback, which helps to improve training and mutual learning. The writeup below is from Ekta.

 प्रशिक्षण अवलोकन का तीसरा दिन
Ekta

प्रशिक्षण अवलोकन का तीसरा दिन! नया गाँव, नए लोग कुछ अलग माहौल | जमुई शहरी क्षेत्रों से कुछ दूरी पर बसा गाँव सरारी का मुख्य द्वार मनो उसकी दुनिया में हमारा स्वागत कर रहा हो | लक्खीसराय की ओर जाने वाली मुख्य सड़क से फूटे हुए इस पक्के सड़क की दिशा में लगभग 1 किलोमीटर चलने के बाद मैं और हमारे प्रशिक्षक सरारी पहुँच ही गए | यह सड़क हमें हमारे पराव (केंद्र) तक पहुँचाकर आगे निकल गयी |
सड़क किनारे स्थापित प्रशिक्षण क्रेंद्र में पांच लोग हमारा इंतजार कर रहे थे | हम 15 मिनट विलंब से पहुंचे |हमारे पहुंचते ही एक लोग और आयें | प्रशिक्षक जाते के साथ लोगो को बताया की 2 लोगों ने मुझे फोन किया है की आज के कक्षा में वो उपस्थित नहीं हो पाएंगे | इस बीच सभी ने कुछ नियम के बारे में बातचीत की जिसे उन्होंने अपनी कक्षा के लिए बना रखा था | नियम कुछ इस प्रकार से है- “जो लोग बिना बताये प्रशिक्षण में अनुपस्थित होंगे उनको 10 रुपया उनके समूह के पास दंड स्वरूप जमा करना होगा |”   
प्रशिक्षक ने कक्षा यह कहते हुए प्रारंभ किया कि समय ज्यादा हो गया है, इस लिए हमें हमारी कक्षा आरंभ करनी चाहिए |
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कक्षा आरंभ की गयी | प्रशिक्षक ने सभी से पिछली कक्षा से जुड़े सवाल पूछना प्रारंभ किया | पिछली कक्षा से जुड़े कुछ मुख्य बातों पर चर्चा शुरू की गयी | जैसे- phonics, चित्र पठन और कविता | प्रशिक्षक ने इसके लिए बोर्ड का इस्तेमाल किया | प्रशिक्षक ने सवाल पूछते समय किसी को नाम लेकर संबोधित नहीं किया | वो सभी को “आप बताइए” शब्द का इस्तेमाल कर रहे थे | इसी बीच एक और प्रशिक्षु ने कक्षा में प्रवेश किया | इस अभ्यास में 7 मिनट का समय लगा |
अगले अभ्यास में प्रशिक्षक ने सभी के हाथ में NCRT का एक पन्ना दिया | इसे पढ़ने के लिए प्रशिक्षक ने सभी को 5 मिनट का समय दिया और अगले अभ्यास की तैयारी में जुड़ गए | 5 मिनट से पहले ही  सभी ने इसे पढ़ लिया | प्रशिक्षक ने सब से पूछा ” तो आपको ये पन्ना को पढ़ने पर क्या-क्या समझ में आया?” कुछ खास उत्तर न मिलने पर प्रशिक्षक ने इसे पढ़ना प्रारंभ किया | खास बात यह यही की प्रशिक्षक ने इस अभ्यास को पिछली कक्षा से जोड़ने का भरपूर प्रयास किया | जब प्रशिक्षक बोल रहे थे तो दो लड़कियां (3 और 4) लगातार नीचे देख रहीं थीं | इस अभ्यास में कुल मिलाकर 10 मिनट का समय लगा |
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पढ़ना क्यूँ जरुरी है?  
अगले अभ्यास की ओर बढ़ते हुए सभी से सवाल किया “अच्छा मुझे बताइए पढ़ना क्यों जरुरी है? आखिर हम क्यों पढ़ते है?” यहाँ पर प्रशिक्षक के बोलने का ढंग अलग था | उन्होंने अपने स्वर को कहीं धीमा और फिर तेज किया जो सुनने में भी रोचक लग रहा था | प्रशिक्षक ने सभी को कम से कम 2 points देने को कहा | सभी ने अपना-अपना जवाब देना प्रारंभ किया | प्रशिक्षक ने सभी के जवाब को उनके नाम के साथ बोर्ड पर लिखना प्रारंभ किया | दो लड़को (6 और 7) ने बोलना प्रारंभ किया और 2 से ज्यादा points दे दिए | इसके बाद प्रशिक्षक ने उन्हें यह बोलते हुए रोका “ अभी और भी लोग हैं, उनसे भी सुन लेते हैं, फिर आपके पास वापस आयेंगे |” प्रशिक्षक ने इस बार सब को नाम लेकर बोलने के लिए आमंत्रित किया | सभी ने जवाब दिया पर लड़कियों से बहुत कम सुनने को मिल रहा था | 2 लडकियां (4 और 5 ) लगातार शांत बैठी थी | इन दोनों ने बस एक point दिया |  points नहीं मिलने पर उन्होंने सवाल किया “अच्छा बताइए पढ़े-लिखे लोगों में और अनपढ़ लोगो में क्या अंतर होता है?” उन्होंने समझाने के लिए बोला हमारी माँ नहीं पढ़ी होती है तो उनको क्या-क्या दिक्कत होता है जिसपर एक लड़की (4) बोल उठी मेरी माँ पढ़ी-लिखी है | लगभग 3 मिनट तक पढ़े-लिखे लोगों में और अनपढ़ लोगो में क्या अंतर होता है इसी पर वार्तालाप होता रहा | प्रशिक्षक ने महसूस किया की उनका बातचीत मुद्दे से हट रहा है तो उन्होंने उनलोगों को फिर से बोलने का मौका दिया जो बोलना चाह रहे थे | इस अभ्यास में लगभग 20 मिनट का समय लगा |
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इस की खास बात यह रही की प्रशिक्षक ने समझाने के लिए आसपास के उदाहरण का अधिक प्रयोग किया | बातचीत के दौरान समय पर भी ध्यान दिया | दिए जा रहे points को वो पूरा-पूरा बोर्ड पर लिख रहे थे जिससे उनका लिखने में अधिक समय जा रहा था | बातचीत का मोर कुछ समय के लिए पढ़े-लिखे और अनपढ़ लोगो के बीच के अन्तर पर रुक गया |
आप कहानी कैसे पढ़ाते हैं?
अगले अभ्यास के लिए सभी को एक पेज दिया गया, जिसमे प्रशिक्षुओं को हाँ और न में 19 सवाल और 1 सवाल लिख कर हल करना था, जिसका सवाल आप अपनी कक्षा में कैसे पढ़ते हैं से जुड़ा हुआ था | इसे करने के लिए प्रशिक्षक ने सभी को 5 मिनट का समय दिया | इस अभ्यास के लिए उन्होंने भाषा की डालियों का इस्तेमाल नहीं किया |
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समय कम होने पर प्रशिक्षक सभी को बता रहे थे “1 मिनट और शेष रह गया है |” इसी बीच एक प्रशिक्षु ने अपना कार्य समाप्त कर लिया | इसके बाद प्रशिक्षक ने सभी से कहा “शिवदानी जी का हो गया है जिनका हो जाये वो हाथ खड़ा कर दें | समय समाप्त होने पर भी 3 लोग लिख रहे थे इसलिए प्रशिक्षक ने 2 मिनट का अतिरिक्त समय और दिया | जिनका हो गया था वो शांति से बैठे हुए थे | आखरी सवाल को दो लड़कियों (3 और 4) ने नहीं लिखा | पूछे जाने पर एक (3) ने बताया समय का आभाव रहा और दुसरे (4) ने बोला मेरे समझ में नहीं आया |
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इस अभ्यास पर बातचीत शुरू की गयी | प्रशिक्षक ने सभी प्रश्नों पर क्रमबद्ध चर्चा करनी शुरू की | चर्चा के लिए प्रशिक्षक ने सभी को हाँ न के अधर पर बाँटना शुरू किया | जितने लोग “हाँ” बोलते थे तो पूछा जाता था “आपने हाँ क्यों लिखा? इसके लिए आप क्या करते है?” जितने लोगों ने “न” लिखा उनसे पूछा जा रहा था “अपने क्यों न लिखा? आप इसे क्यों नहीं करवातें हैं?”
इस अभ्यास की सबसे अच्छी बात रही कि प्रशिक्षक ने उनसे आपस में ही चर्चा करवाने की कोशिश की | अगर किसी ने हाँ बोला तो वो लोगो को बताते थे की मैं ये करता हूँ | अगर न बोलने वाले को उनकी बात सही नहीं लगती थी तो उनसे सवाल पूछते थे | एक-दो सवाल ऐसे हुए जिसपर उन्होंने प्रशिक्षक से सवाल किया | एक लड़की (2) ने दो प्रश्नों का उत्तर हाँ में दिया जबकि वो नहीं करवाती थी | चर्चा होने पर उसने ईमानदारी पूर्वक जवाब दिया और अपने जवाब को बदला | चर्चा के दौरान दो लड़कियां (4 और 5) लगातार शांत बैठी हुई थी | प्रशिक्षक के पूछे जाने पर हाँ या न में जवाब दे रही थी | एक लड़के (7) को एक प्रश्न ठीक से समझ नही आया तो उसने प्रशिक्षक से फिर से इसपर चर्चा करने का अनुरोध किया पर प्रशिक्षक ने इसका जवाब खुद न देकर उसके सहयोगी को देने को कहा और अंत में बोले | इस अभ्यास में भी प्रशिक्षक ने बोर्ड का भरपूर इस्तेमाल किया | इस अभ्यास में लगभग 12 मिनट का समय लगा |
आपके केंद्र पर बच्चे कैसे कहानी पढ़ते हैं? (Decoding का प्रचलन):-
इस अभ्यास पर कक्षा में कोई बातचीत नहीं हुई |
कहानी/कविता से कक्षा की शुरुवात:-
इस अभ्यास पर भी कक्षा में कोई बातचीत नहीं हुई |
पढ़ना कैसे सुलभ हो
इस अभ्यास के लिए हमारे प्रशिक्षक ने सभी को 10 मिनट का समय दिया और वो अपने अगले अभ्यास की तैयारी में जुट गए| उन्होंने अगले अभ्यास के लिए कुछ कागज के छोटे-छोटे टुकड़े करना शुरू किया | 10 मिनट के अन्दर सभी ने लगभग इस चार पन्ने के लेख को पढ़ लिया | इस अभ्यास में प्रशिक्षक ने सभी को बारी-बारी से एक-एक point पढने बोला और क्या समझ में आया पूछा | लगभग सभी points को प्रशिक्षुओं ने ही आपस में पढ़-पढ़ कर समझ लिया | प्रशिक्षक बातचीत के बाद अंत में कुछ समझाने के लिए बोलते थे | fluency के सभी points को प्रशिक्षक ने समझाया | इस बीच प्रशिक्षक ने दो बार अपनी घड़ी की ओर देखा | समय अधिक होने के कारण उन्होंने अंत 4-5 के वाक्यों को बस बोलकर  छोड़ना चाहा पर सभी के बोलने पर उसे फिर से समझाया | इस अभ्यास में कुल मिलाकर लगभग 30 मिनट का समय लगा |

कहानी पठन  
इस अभ्यास के लिए प्रशिक्षक ने 5 मिनट में सभी को एक नन्ही लड़की की कहानी पढने दिया | 5 मिनट के अन्दर सभी ने कहानी को पढ़ लिया | इसके बाद प्रशिक्षक ने सभी से कहाँ “ अगर आप इस कहानी को अपने बच्चों को पढ़ाएंगे तो इससे जुड़े क्या-क्या सवाल पूछेंगे?” उन सवालों को इन पन्नों के टुकड़े में लिखें | एक टुकड़े में एक ही प्रश्न लिखें |” सभी ने इस अभ्यास में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया | सभी के पास 15 से ऊपर ही सवाल लिखे हुए थे | सभी लोगो ने एक जैसे सवाल को एक जगह रखना शुरू किया | प्रश्नों का वर्गीकरण कौन, कब, किस और कैसे के आधार पर करना शुरू किया |
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प्रशिक्षक ने नानी की जगह दादी शब्द का इस्तेमाल किया जो इस कहानी की पात्र थीं, इस पर सभी ने बोला “ सर दादी नहीं नानी थी |” इस अभ्यास में लगभग 15 मिनट का समय लगा |
Bloom’s taxonomy  
इस अभ्यास के लिए प्रशिक्षक ने सभी को इससे जुड़ा लेख दिया | इस अभ्यास में पढने के लिए कोई समय नहीं दिया गया | सभी से बोला गया जिनका हो जाये वो चुटकी बजा दें | सभी ने ऐसा ही किया और 10 मिनट के अन्दर सभी ने चुटकी बजा कर पढ़ लेने का संकेत दिया | प्रशिक्षक ने सभी points पर चर्चा करनी शुरू की | उन्होंने इस अभ्यास को पिछले अभ्यास के साथ जोड़ने का प्रयास किया और वही से उदहारण के साथ-साथ बाहरी उदाहरण भी प्रस्तुत किया | apply वाले points पर बहुत कम उदाहरण दिए गए | फिर सभी को अपने प्रश्नों को Bloom’s taxonomy  के आधार पर बाँटने को कहा गया | इसके लिए प्रशिक्षक ने सभी 6 points को कागज के टुकड़ों में लिख दिया और उसके नीचे सवाल सजाने को कहा | सभी ने इस अभ्यास में भाग लिया | वो सजाने वक्त आपस में बातचीत कर रहे थे कि कौन सा सवाल कहाँ जाना चाहिए | सजाने के बाद सभी ने प्रशिक्षक के साथ इसपर बातचीत की कि उन्होंने कैसे-कैसे सवाल कहाँ रखें | बातचीत के दौरान पता चला की ज्यादा सवाल यादास्त पर आधारित है | फिर प्रशिक्षक ने सभी से इसे अपनी कक्षा में इस्तेमाल करने का अनुरोध किया | साथ ही साथ उन्होंने उन लोगो को भी पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जो अभी तक नहीं पढ़ा रहे हैं | इस अभयस में कुल मिलकर 20 मिनट का समय लगा |
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चलते-चलते प्रशिक्षक ने सभी से आज हमने क्या-क्या जाना पूछा | एक लड़की (5) से पूछे जाने पर कोई जवाव नहीं मिला | हल्की सी बातचीत के बाद 3:30 मिनट में कक्षा समाप्त हो गयी |( 5 मिनट)
विराम चिन्ह लगाएं अभ्यास
इस अभ्यास को इस कक्षा के लिए सूपुर्द कर दिया गया |

Thursday, December 1, 2016

Observations at a training session, by Ekta

i-Saksham  follows the practice of one trainer being observed by another while imparting training. This is followed by a fact based feedback, which helps to improve training and mutual learning. The writeup below is from Ekta.

                           प्रशिक्षण अवलोकन का दूसरा दिन- 

Ekta


मेरे लिए ये दूसरा मौका था जब मैं अवलोकन के लिए गयी | परन्तु ये मेरे लिए कुछ विशिष्ट था, क्योंकि मैं उनके अवलोकन के लिए जा रही थी जो फील्ड में काफी प्रतिभा और जानकारी लिये जा रहे थे | मेरी अपेक्षा से अधिक दूरी तय करने के बाद हम उस गाँव तक पहुँच ही गए जहाँ के लिए सफ़र शुरू किया था |
वो स्थान जहाँ मैं और हमारे प्रशिक्षक(trainer) पहुंचे, उस स्थान का नाम कहरडीह है | प्रशिक्षण का केंद्र वहीँ स्थित एक सरकारी स्कूल था, जिसमें माध्यमिक और उच्च दोनों ही स्तरों के लिए शिक्षा की व्यवस्था थी | स्कूल के बाहर तीन लड़कियां हमारा इंतजार कर रही थीं और दो लड़के उस कक्षा के बाहर जहाँ प्रशिक्षण(training) दिया जाना था | हमलोग 20 मिनट विलंब से पहुंचे | हमारे पहुँचते ही सभी उस कक्षा तक पहुँच गए | एक लड़का भागा-भागा बैठने के लिए चटाई लाता दिखाई दिया और एक बच्चें ने शायद इन्ही में से किसी के घर से लिखने के लिए बोर्ड और मार्कर लाया | कक्षा में कुल मिलकर 7 प्रशिक्षु(trainee) आयें |
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जब मैं कक्षा के अंदर गयी तो मेरा ध्यान सबसे पहले जिसपर गया वो था कक्षा के तीनों कोनों में कुछ समेटी तो कुछ बिखरी हई धूल की परत | चौथा कोना दरबाजे के पीछे छुप गया था इसलिए उसका हाल नहीं पता | यह बात मेरे लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं होता, पर ये वही केंद्र था जिसपर सभी ने अपने आदर्श केंद्र के लिए स्वछता को चुना था | फिर मेरे मन ने दूसरे ही पल सोचा “ अरे ये सरकारी भवन है, इन भवनों को भी पता है |”
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कक्षा प्रारंभ की गयी | प्रशिक्षक ने सभी प्रशिक्षुओं से पिछले प्रशिक्षण से जुड़ा हुआ सवाल पूछना प्रारंभ किया | पहला सवाल हमलोगों ने पिछली कक्षा में क्या-क्या सीखा? इसका जवाब आने में लगभग 2 मिनट लग गए फिर एक(7) ने जवाब दिया phonics | इसपर प्रशिक्षक ने प्रोत्साहित करते हुए पूछा अच्छा phonics क्या है? इसका जवाब कुछ अस्पष्ट शब्दों में उसी ने दिया जिसने इस शब्द को बोला | कुछ याद आने पर उसके साथी(2) ने उसका सहयोग करते हुए  फिर प्रशिक्षक ने कहा बताइए इसके अलावा हमने क्या पढ़ा तो दूसरे लड़के ने जवाब दिया चित्र पठन | प्रशिक्षक के पूछे जाने पर की चित्र पठन क्या है इसका जवाब एक लड़की (3) ने दिया | प्रशिक्षक को सवालों ने जवाब निकलवाने के लिए हर बार पिछली कक्षा से जुड़े एक से अधिक उदाहरण देने पर रहे थे |
इस अभ्यास की सबसे खास बात यही रही कि प्रशिक्षक ने पिछले कक्षा में दिए गए प्रशिक्षण का सभी से हाल पूछा | सभी से जानने की कोशिश की कि उन्होंने इसे अपनी कक्षा में बच्चों के साथ करना प्रारंभ किया की नहीं |
और दूसरी बात यह दिखी की कोई भी प्रशिक्षु दिए गए प्रशिक्षण को दूहरा नहीं रहे थे | पिछले प्रशिक्षण को लेकर उनकी यादास्त धुंधली थी | इस अभ्यास को कराने के लिए 10 मिनट का समय निर्धारित था जबकि 25 मिनट लग गए |
पढ़ना क्यूँ जरुरी है?    
प्रशिक्षक का अगला सवाल था पढ़ना क्यों जरुरी है? इसका जवाब प्रशिक्षक ने सभी से उनका नाम बोल-बोलकर लेना चाहा | इसके लिए प्रशिक्षक ने बोर्ड का इस्तेमाल किया | दो लड़को (7 और 2) ने इसका जवाब उत्सुकता पूर्वक तुरंत में दो बार दिया | फिर प्रशिक्षक ने सभी से कम से कम एक point बोलने को बोला | एक लड़की (3) को छोड़कर बाकी सभी ने एक-एक तर्क दिया | जब न बोलने वाले (3) से पूछा दुबारा पूछा गया तो उसने बोला मेरे पास कोई point नहीं है तब प्रशिक्षक ने मजाकिया अंदाज में बोला points आने के लिए भी पढ़ना जरुरी है | सभी लोग मुस्कुराने लगे | (7 मिनट)
आप कहानी कैसे पढ़ाते हैं?    
इस अभ्यास को कराने के लिए सभी को 2 समूहों में बाँटा गया | प्रत्येक समूह को शब्दों की डालियाँ सजाने को दिया गया |
इस अभ्यास में पहले समूह से मुख्यतः केवल 2 लोग क्रियाशील थे, जबकि समूह में कुल चार लोग थे | इनके बीच बातचीत बहुत कम हुई, पर कार्ड में क्या लिखा है सभी ने देखा | दूसरे समूह में तीन लोग थे जिसमे धीमे-धीमे स्वर में कुछ बूद-बुदाने की आवाज आ रही थी |
कार्ड सजाने के बाद प्रशिक्षक ने दोनों समूहों को एक-दूसरे की सजी डालियों को देखने को कहा | सभी ने एक-दूसरे की डालियाँ देखी पर कोई संवाद नहीं हुआ | प्रशिक्षक ने सभी के कार्ड को देखा और उसे पढ़कर सुनाया | कुछ देर बाद प्रशिक्षक ने समूह 1 से पूछा अपने ऐसा क्यों सजाया तो उसमें से केवल एक लड़का (2) लगातार बोले जा रहा था |  समूह 2 से पूछे जाने पर एक लड़की (4) बहुत धीरे पढ़ रही             थी तब प्रशिक्षक ने पढने में उसकी मदद की |
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यह अभ्यास सामूहिक अभ्यास था पर इसमें समूह की भागीदारी बहुत कम नजर आ रही थी | प्रशिक्षक भी शुरू से अभी तक लगातार ओरों से अधिक केवल तीन लोगों (2,3 और 7) से सवाल कर रहे थे | (15 मिनट)
आपके केंद्र पर कहानी पाठ
इसके लिए प्रशिक्षक ने सभी को एक कागज दिया जिसमे कुछ प्रश्न थे | इन प्रश्नों का उत्तर उन्हें हां या नहीं में देना था | दिए गये पेज में क्या करना है प्रशिक्षक ने सभी को समझाया | भरने ने दौरान दो लड़के (1,2) आपस में बात कर रहे थे | इस पेज को भरने में एक लड़के (7) ने लगभग 10 मिनट का समय लिया | उसके होने पर प्रशिक्षक ने उसका नाम लिया और बोला इनका हो गया है | इसी बीच दूसरे लड़के (1) ने भी लिख लिया | प्रशिक्षक ने अब इन दोनों का नाम लिया | लिख लेने वालों में से एक (7) ने अपना मोबाइल देखना शुरू कर दिया | 15 मिनट बीत जाने के बाद भी 3 लोग लिख ही रहे थे | इसपर प्रशिक्षक ने उन्हे 2 मिनट का अतिरिक्त समय दिया |
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अभी तक के अभ्यास में पहली बार प्रशिक्षक ने समय शब्द का इस्तेमाल किया |
इस पेज के कुल मिलाकर 19 शब्द ऐसे थे जिसपर उन्हें हाँ और न में जवाब देना था और एक प्रश्न में अपने विचारों को लिखना था |
प्रशिक्षक ने 3,5,7,10,15,16,18,19,12 और 9 नंबर के प्रश्नों पर क्रमशः बातचीत की | सभी अपना जवाब ईमानदारी से दे रहे थे | प्रशिक्षुओं द्वारा लिखे गए आखरी प्रश्न पर कोई बातचीत नहीं की गयी |
  • आपके केंद्र पर बच्चे कैसे कहानी पढ़ते हैं?
    (Decoding का प्रचलन) - इस अभ्यास पर प्रशिक्षक ने कोई वार्तालाप नहीं किया |
  • कहानी/कविता से कक्षा की शुरुवात- इस बिंदु पर भी कोई बातचीत नहीं की गयी |
पढ़ना कैसे सुलभ हो  
इस भाग में प्रशिक्षक ने सभी के हाथ में लगभग चार पन्ने का लेख दिया | सभी प्रशिक्षु इसे ध्यान से पढ़ रहे थे | सभी पढने में इतने व्यस्त थे की मुझे बस बाहर मैदान में खेल रहे बच्चों की आवाज सुनाई दे रही थी | सभी के साथ के साथ-साथ हमारे प्रशिक्षक भी उतनी ही गहराई से नजर बिना इधर-उधर किये पढ़ रहे थे मनो सभी की तरह उन्होंने भी इन शब्दों को यहीं देखना शुरू किया हो |
प्रशिक्षक ने पढ़ने के बाद सभी प्रशिक्षुओं से कहा “जिनका-जिनका हो जायेगा वो चुटकी बजा दें |”
मिनट बाद सभी ने चुटकी बजा कर पढ़ लेने का संकेत दिया |
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इसके बाद प्रशिक्षक ने सब से सवाल पूछा :–
क) यह document किया है?
ख) कौन-सा point पढ़कर अच्छा लगा?
पहले प्रश्न का उत्तर मिला-जुला मिला परन्तु दूसरे प्रश्न पर सभी ने अपनी-अपनी राय रखी | 7 में से 3 को fluency का समर्थन किया, दो ने चित्र पठन और एक ने phonic की बात कही | एक लड़का (2) बोलते-बोलते चुप हो गया क्योंकि एक लड़की (3) उसपर हंसने लगी | प्रशिक्षक ने इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया और अभ्यास को आगे ले गए |
इस अभ्यास के शुरुआत के तीन बिन्दुओं पर प्रशिक्षक केवल पढ़ते और समझाते गए पर चौथे बिन्दुओं से उन्होंने उनसे इससे सम्बंधित कुछ सवाल और उदाहरण लेना शुरू किया | इस अभ्यास में board का इस्तेमाल किया गया | (30 मिनट)  
इस अभ्यास के लिए कुल मिलाकर 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया था पर इसमें लगभग 45 मिनट लग गया |
कक्षा के अंत होने पर पूरी प्रशिक्षण का अवलोकन करने के लिए प्रशिक्षक ने गाना बजाया और सभी को घूमने के लिए बोला | गाना बंद होने पर सभी को अपना एक पार्टनर चुनना था और बात करनी थी की अपने आज क्या सिखा | इस अभ्यास में 2-2 की संख्या में 4 समूह बने जिसमे हमारे प्रशिक्षक भ सामिल थे | समूह का चुनाव सभी ने अपने मन से किया, जिसमे पाया गया की सभी ने अपने दोस्तों को ही अपना पार्टनर बनाया | पहले समूह की दो लड़कियां(5 और 6) ने आपस में समूह बनाया | इन्होने बहुत कम बातचीत की | ये लड़कियां प्रशिक्षण के दौरान भी साथ में बैठी थी | इन दोनों ने  प्रशिक्षण के दौरान भी बहुत कम बोला | इनके अतिरिक्त समूह-2 दो लड़कियों(3 और 4) आपस में बात कर रही थी पर उनका वार्तालाप 1 मिनट के अन्दर समाप्त हो गया | तीसरे समूह में दो लड़के (2 और 7) थें | इन दोनों ने आपस में बातचीत की | चौथे समूह में एक लड़का(1) और प्रशिक्षक मौजूद थे | इस समूह में भी बातचीत हुई | (लगभग 5 मिनट)
इस अभ्यास के बाद प्रशिक्षक ने सभी प्रशिक्षुओं से कहा “ अभी 3:35 का समय हुआ है | क्या आपलोग 20 मिनट का अतिरिक्त समय और दे सकते है? इसपर एक प्रशिक्षु(3) ने कहा अब तो 3:30 बाज गया है अब हमारे पास समय ही समय है | आज नहीं पढ़ा पाएंगे |
इसके बाद प्रशिक्षक ने उन्हें एक नन्ही लड़की की कहानी पढने दी | सभी ने कहानी पढ़ी | प्रशिक्षक ने ने उनसे कहा “ अगर आपको इस कहानी को आपकी कक्षा में पढ़ते तो कैसे-कैसे सवाल पूछते?”
सभी ने अलग-अलग तरीके का सवाल किया | इसके बाद प्रशिक्षक ने ने सभी से कहा “ आप सभी इसमें आने वाले शब्द बताइए|“ इस अभ्यास के लिए प्रशिक्षक ने  2 मिनट का समय दिया | सभी ने एक या दो शब्द निकल कर दिया | (20 मिनट)
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प्रशिक्षक ने चलते-चलते सभी को एक गृहकार्य दिया- “आप सभी एक-एक कहानी बना कर लाइयेगा |”
समय की कमी होने के कारण बाकी के अभ्यासों को अगली कक्षा को सूपुर्द कर दिया गया |

Friday, November 18, 2016

Come, search names

Come, search names
By Ekta Kumari

  Identify, speak, write your names activities
It was a great learning experience to conduct “Come search our names” activity with KGBV,Jamui students. Colours have something magical power with them, power that captures our imagination and take us to a different place. These coloured sticky notes with names of students written on them were flying in the ceilling fan’s air resembling like a beautiful butterfly wings. All the girl students were very excited to see their names on the sticky notes, a girl was talking to her friend “I found it.see my name is there, 5th on the top row on the red sticky note. But, how did these papers got stuck to the wall. Didi didn’t used any gum”
 
Why to identify names and relate to it is important?
Jamui is a small district, on the southern most side of Bihar, sharing its border with neighbouring state Jharkhand. As per 2011 census, the overall literacy rate in the district was 59.79%, while the female literacy rate was at 47.28%. It has one of the highest early marriages rate in the state.
KGBV, is one of the most important intervention of the government to directly have an impact on lives of girls who come from marginalized socio-economic background. Jamui, has 10 KGBVs across its 10 blocks. Every KGBV has 100 residential girl students, who are from class 6-8th standard. This residential environment provides these girls to come togther and share their ambitions, dreams, fear and if channeled rightly could be a great platform to inculcate sense of confidence in these girls, towards their own potential.
Our identity starts with our name, its not only an arrangement of alphabets, but carries with it meaning we seldom care about. But, as one of our KGBV teachers shared during one of i-Saksham training “My name is Anita, as we are 6 sisters and I am the eldest, so my father started my name with A, and the other sisters followed in similar alphabetical sequence.” One of our team member name is Tanuj, because he is the youngest in family. The other teacher had her name Shabana, because her maternal grandfather was a fan of Shabana Azmi. Someone has her name because of what her parents wanted them to be. So, everyname has a story. This exercise we conducted at KGBV is the first step to identify, whether the girls are able to identify, speak and write their names properly in Hindi and English.


Come Search our names: what we did in this exercise?
Activity 1: Search your Hindi and English names from the sticky notes posted on the wall
We have alltogether 93 girl students in KGBV,Jamui. All these girls were made to seat in different classrooms based on their respective classes. We had sticky notes, with Hindi and English names of the students written on them. These sticky noted were posted on the wall and the board. Students went in a group of 10 to the board and tried to find their names. Once, you find your name, they were asked to take out the sticky note and carry it with them to their respective seating place.
 
What we observed
19 students couldn’t find their names in Hindi, and 22 students couldn’t find it in English. Class 6th students were facing more problems in identifying their names. One student Vandana, was unable to find her name beacuse we have written her name as Vandana, while she writes it with “B” i.e. Bandana. One other interesting observation was that their was not much difference between the total number of students who didn’t know their names in Hindi and those who didn’t know their names in English.
Class Total no. of students Couldn’t identify names in Hindi Couldn’t identify names in English
6 36 14 14
7 15 2 3
8 42 3 5
Total 93 19 22









Activity 2: Search your friend’s name
 All the sticky notes were placed in the middle of the classroom floor. Students went in groups and searched for their friend’s name and gave it to them.
 

What we observed
Students who were unable to find their names on the sticky notes, were the ones who failed to identify their friend’s name. Some of the students who were unable to find their name in the first activity got it right with this second activity, by seeking support from fellow group members.

Activity 3: Sing with our names
In the next activity students were asked to come in front and speak their names in Hindi, following her would be a girl whose name will start from the last letter of Neelam. If we end up with any letter, with which no names start among the students, teacher will call out a different letter.

What we observed
All the students of class 7 & 8 easily completed this activity. None of the girls had difficulty in speaking their names. However, for the students of class 6, the first round was not easy, as the volunteers were made to repeat the last letter again and again. In the second round this problem didn’t occur.
 
Activity 4: Write your names in Hindi & English
All the students were given a leaflet divided in two,  on which they were asked to write their names in Hindi and English.
What we observed
One interesting observation, was that most of the girls could write their names in Hindi and English.  Even the girls who were finding it difficult to identify their names could write it in English and Hindi. However, the number of girls in std. 7 who couldn’t write their names was much more than the number of student who couldn’t do the same in class 6.
Class Total no. of students Couldn’t write names in Hindi Couldn’t write names in English
6 36 3 3
7 15 3 7
8 42 - -
Total 93 6 10

 


Come search our names activity flow:

Volunteer participated
Ekta Kumari (with Std.8)
Mamta Kumari (with std. 7)
Nikita & Nalini (with std. 6)



                                                                                 
                                                                     

Saturday, January 2, 2016

End of 2015 update and New Year Wishes

Warm wishes on the new year,

Children at a Saksham Kendra


At the outset, we wish to convey you the sense of gratitude from all the people, to whom your support  has brought new hope. There are ample challenges, but so are the opportunities. Here is a brief account of the work i-Saksham has done through your support.

With your due support, i-Saksham raised INR 5 lakh in the month of June. Now, it has expanded to 50 tutors. Training and monitoring is core to delivering education in these areas. We are now a team of 5 members, with three full time trainers on board. We purchased 50 tablets and accessories, three laptops worth approximately INR 3 lakh, and spent INR 1 lakh on various admin overheads.

Following have been the key highlights of this quarter operations and achievements:
1. i-Saksham started digital literacy training to more than 100 youths from very poor families under the govt. sponsored program, National Digital Literacy Mission
2. i-Saksham partnered with READ India, and building community tutorship skills of 10 adolescent girls at Deo Block of Aurangabad District, Bihar.
3. i-Saksham carried out a brief post assessment exercise at 10 community learning centres

* It was pleasant to see that children who submitted blank baseline test paper, could now write basic alphabets, and read numbers.
* There have been steady progress on weak curricular indicators identified during the baseline test.

Kanchan's story:



Kanchan Kumari is a 12th pass, 31 year old female from village-Bhawanipur of Deo Block, Aurangabad Dsitrict Bihar. Within couple of weeks of training, she went to her village and started a learning centre with 30 poor kids.

Please listen to her sharing her experiences how a small android tablet with digital content is changing her life. She expresses she now has more learning opportunity and feels humbled to contribute towards betterment of education of poor children.

Wish the coming year brings great health, happiness and opportunities to give life better meanings; to you and your near dear ones.

Friday, August 7, 2015

Story of an i-saksham entrepreneur- By Aman Bharadwaj, PMRDF

                Near the blurred boundary of urban Jamui, on the highway joining Munger, there lies a village Khairma. At the door of a green painted house of the village, children had lined up to enter. Tanuj stopped our motorbike there. This house was the first place where tablet PCs, loaded with digital material for primary schoolchildren, were given to community tutors (called Saksham mitras) by i-saksham team. Except on sundays, children came here daily with their books and notebooks clutched in their armpits. In the room next to the front room of the house, they sat on the mat on the floor. The one and half hour classes used tablets for forty five miuntes to one hour. The usually class went from 6:30 to 8:00 in the morning.
                Tanuj entered into the room and introduced me to Mamata. I followed.
                22 years old Mamata, the saksham mitra, has been an inspirational figure among children. Since her earliest memory, her feet were thin, weak and unable to support her body weight. She doesn't have any memory of walking. She studied upto class eight in the local middle school, but it took her a lot to convince her family members to continue it upto tenth. She matriculated in 2007 and after exerting continuous pressure on her family, she could enroll herself in intermediate in 2009. She took Political science, history and sociology as subjects and finished it in 2012. Since then, she has been tutoring children. Most of the children she teaches now study in class 1-5, but she feels the digital content promising to enable her to tutor higher classes soon.
                In the morning class, there were around twenty-five students, mostly girls enrolled in local government school. The chatter of the students continued until Mamata entered into the room. Mamata crawled up to the cot and hopped on the cot.
“Everyone, Show me your homeworks!”, she announced.
Children stopped their giggles and came to her with their notebooks, one by one. After receiving few ticks and crosses on their copies they returned back to their seats. Some smiled; some were sad. After checking the notebooks, Mamata turned on an electronic device, a tablet PC, that has been an object of excitement among students.
                'Today, we will study the chapter 'Vikram-the wise king' ' Mamata said. 'Vikram-the wise king', the chapter from an English book of class IV. Though the constant avoidance of English by teachers (school and tuition teachers alike) has turned English into a nightmare for the students, Mamata has taken on the challenge with the help of technology.
                She picks up and turns the tablet on. Several videos of class chapters have been recorded and put in the tablet along with few educational games by i-Saksham team. Browsing through folders, she clicks on an icon, 'Vikram-the wise king'. The video starts playing. This whole chapter has been narrated and explained in the local language in the video by Shravan Jha, i-saksham member. With few moments of turning on the device, every kind of sound vanishes from the class. The small device takes hold of the reins of attention of all children. The video runs for ten minutes.
'Now tell, What this story is about?', Mamata asks.
A rush of excitement covers the children. Many children speak, in high voices, to be heard, with different answers.
'One by one.', she said.
There were some confused faces too. Looking at them, The video was again played and stopped at few points for detailed elaboration. Mamata read out the chapter slowly as per their comfort.
                Now, the whole class was able to answer the questions. After teaching them the chapter, she asked the students to note down a paragraph from the book.
She looked at me.
'The test-scores of the children have improved after I started teaching them using the tablets', she said with a smile.
'How else do you use it?', I asked pondering if she was creatively using the device.
'In many ways. Sometimes, I let weaker children play games of mathematics and english words. Daily, for fifteen minutes, at the end of the class, I form a group of seven and let them play Word Swipe' She replies.
'What is word swipe?'
'It is a word game where children search the names of fruits, animals, places, etc., from an array of words.
'Good. Are the kids learning?'
'Yes. The weakers ones have become fast in calculation and fast ones faster.'
'Good, you should screen children movies on it sometimes.'
'We do. On saturdays. Last week, we showed them 'How to train your dragon' (the hindi dubbed version).', Mamata says with a smile.
I smiled, too.
Mamata drags herself inside. It was after getting tea I discovered she had gone inside to ask her sister to prepare tea for us.
                From the classroom, I called few students. They are: Arti, Neha, Anjana and Seema. I asked them mathematics tables and few questions from another story 'Three wishes of Meena', (a hindi story on sanitation awareness from class IV). To my surprise, they were able to answer every question. Some more children gathered around and giggle.
Mamata entered.
'Go back to your seats', I said.
All kids returned to their places.
'So, the tablet has benefitted you?' I asked.
'The kids are learning faster. Now, I teach English, Mathematics easily. Also, the number of kids has increased. So, increase in income.'
I smiled and rephrased my question, 'No, I meant, do you learn anything from tablet?'
'As I am unable to go outside, I spend my time on this. Sometimes, I use internet on it, but it is not working on this new tablet.'
Tanuj, the i-saksham volunteer accompanying me, took the tablet from her and checked.
'We'll replace it with a different tablet by tomorrow.', he said in assuring voice.
'If something more could be uploaded on this, it would be easy for me to learn something.'
'We will see what can be done.' I said with a promising emphasis.
A little girl, perhaps one of her students, came with a tray in her hand.
'Sir, please take tea.', Mamata said.
'It was not needed.', We took along with saying this.
I looked at the watch. Quite a time had passed.
'Mamata, it must have taken a great deal of determination and courage for you to continue your studies in this environment.' I asked after knowing that the locality didn't encourage girls' education a few years back.
'Yes, sir. Then, it was difficult. Now, it has been easy.'
'Were you inspired by someone?'
'Not as such.'
'No, I meant, any friend, any teacher, any relative or anyone.'
'A teacher from the neighborhood used to motivate me. His belief in me made me trust myself.', a confidence rests on her voice.
'What does he do now?'
'He still teaches.'
I looked at the watch again.
'Ok Mamata. I will tell them about the need of the content.', I said, referring to my friends.
                We rose from the four-legged bed, waved good bye to the kids and walked out of the room. While departing, I saw a smile on her face. She began to teach mathematics. In the moments when Tanuj started off the bike, few thoughts ran in my mind: the quick answers of the children, the wonder of technology that made the good education reach Mamata, the barriers being overcome, technology making the learning too interesting for children. A sense of wonder filled me. Technology bringing good education at the doors of community, in a way that interested children, was no less than a revolution in embryo.
                The bike started and soon the peace of village was pushed aside by the blazing horns of the trucks on the highway. I too started thinking of opening an i-saksham center in my neighborhood.


Probably, Mamata had inspired me too.