Saturday, April 7, 2018

Experience sharing from Sonam Bharati, i-Saksham Fellow



Comments from Sonam Bharati, one of the i-Saksham Fellows

"Good evening. Before I want to tell you that last day(Sunday) my lesson plan not complete. So, today I taught from back day lesson plan and according to my Hindi, English and we learn English lesson plan complete today. At first I started class mediation and back class on large discuss. Children one by one told me about people back day came from my school center visit. After that discuss
on story (kitne crow). I found that children understand toओ(ो)  ki matra and recognize to Hindi letter. I English class started with a small game activity and after that I asked all students one by one English words related  from our food . children recognize to alphabets and learned to missing words. At last time some children given to self introduction. Similarly, today's end my class."


बच्चे 'ओ' की मात्रा वाले कार्ड पहचानते हुए 

Sonam Bharati's lesson plan







Friday, March 23, 2018

Sanjay Das, i-Saksham Fellow Writes: Experience and Learning from his class

 20th March, 2018

My teaching experience 

Today, when I was to start a rhyme then the children said to me, " we all shall play a rhyme with action," I replied to them ok, you can start. So they played a rhyme action. After that, I started to teach at first, I wrote six lines from Class-2, Lesson-16, Holi, I read it the children also followed me as I was speaking.

After that, they also read it one by one, I told them that you will circle the word, which word I shall speak. They circled correct word. They were very happy today because, they played a rhyme with action themselves.

Thank you


Tuesday, June 6, 2017

सीखें: Teaching poem reading at KGBV Jamui

कविता पाठ
सीखें
-Nalini and Nikita
कविता का उदेश्य :  यह कविता कक्षा 3 से ली गयी है| इस कविता को चुनने के पीछे हमारा उद्देश्य था कि बच्चियां कविता के माध्यम से खेल-खेल में सजीव और निर्जीव के बारे में सीख सके और दूसरा सबसे अहम् कारण यह था कि इस कविता में छोटे-छोटे शब्दों का तथा आसपास में आसानी से देखे जाने वाली वस्तुओं का चुनाव किया गया जिसे बच्चियां आसानी से समझ सकती थी और सीख सकती थी| इस कविता के माध्यम से नैतिकता का भी बोध करवाने का प्रयास किया गया है| इस कविता में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया वे सारे शब्द सजीव है, और इसके द्वारा हम उन्हें सजीव और निर्जीव वस्तुओं से अवगत करने में सफल हो सकते हैं| ये हमारा विश्वास था|
हम कक्षा में गए और छत्राओं से जानने का प्रयास किया कि उन्हें कविता पढ़ना कैसा लगता है| सभी कविता के नाम पर खुश हो गयीं| फिर हमने उन्हें बताया आज हम “सीखो” कविता पढेंगे| इस कविता की भूली-बिछड़ी दो पंक्तियाँ सुषमा और गीता को पहले से आती थी| इन दोनों के अलावा ये कविता सभी बच्चियों के लिए नई थी, जबकि सभी बच्चियां कक्षा 6 की छात्रा हैं|
               
हमने उन्हें कविता का उदेश्य और कविता के अर्थ को गाकर और उसके साथ थोड़ा अभिनय करके दिखाया| हमने बच्चियों से भी ऐसा करने को कहा| सभी ने हँसना शुरू कर दिया| सभी को अकेले-अकेले करने में शर्म आ रही थी तो हमने उन्हें 5-5 के समूह में बाँट दिया और 10 मिनट का समय दिया और बोला आप लोग अपने समूह में इस कविता का अभ्यास करें, हमलोग साथ-साथ इस कविता को गायेंगे और अभिनय करेंगे| सभी अपने-अपने समूह के साथ आतीं 2 लड़कियां कविता पाठ करती और 3 लड़कियां गुनगुनाते हुए अभिनय करती| सभी लड़कियों ने बारी-बारी से अपने समूह में कविता का पाठ किया और अपने-अपने तरीके अभिनय किया|
इसके बाद हमने उन्हें कक्षा से बाहर खुले मैदान में जाने को कहा और अपने आस-पास की चीजों को अपनी-अपनी कॉपी में लिखने को कहा| जब बच्चियां कक्षा में वापस आई तो उनमे से एक ने बड़ी उत्सुकतापूर्वक पूछा, “दीदी! हमने इसे क्यों किया?”| फिर हमें सभी बच्चियों से ही पूछा “अच्छा बताओ की हमलोग ने अपने आस-पास की कौन-कौन-सी वस्तुओं को देखा? इन वस्तुओं से हमें क्या-क्या सीखने को मिल सकता है? जैसा की हमने कविता में थोड़ी देर पहले सिखा|”  सभी बच्चियां एकदम शान्त थी पर उनके चेहरे पर ये जानने की इच्छा हो रही थी, हमने इसे क्यों किया| साथ ही साथ वे हमारे सवाल का जवाब ढूंढने का भी प्रयत्न कर रहीं थीं |
             
किसी से जवाब न मिलने के बाद हमने उनसे कहा आपलोगों ने जो-जो लिखा है उसे बारी-बारी से बताइए | ध्यान रहे जो शब्द बोल दिए जा चुके है उनको छोड़कर दूसरा शब्द बोलना है| सभी बच्चियों की कोपी से हमे 37 शब्द मिले | फिर हमने उनसे पूछा इसमें से कौन-सी ऐसी वस्तु है जिसे भगवान ने बनाया है और कौन-सी ऐसी वस्तुएं है जिसे आदमी ने बनाया है? लगभग सभी ने सही-सही चुनाव किया| इसके बाद हमने उन्हें बताया जिसे भगवान ने बनाया उसे सजीव और जिसे आदमी ने बनाया उसे निर्जीव वस्तु कहते है | इससे हमें सजीव और निर्जीव के बारे में बताने में सुविधा हुई और वे भी आसानी से दोनों के बीच के अंतर को समझ पाई| फिर हमने कहा हमलोग इसलिए बहार गए थे, इससे हमें सजीव व निर्जीव वस्तु के बारे में जानकारी प्राप्त हुई | इसके बाद हमने सजीव और निर्जीव के गुणों के बारे में बात करना प्रारंभ कर दिया जिससे उनकी समझ और विकसित हुई |
इसके बाद आश्चर्य की बात यह हुई की कि जब जब हमने सजीव और निर्जीव वस्तु बोला तो अभी भी 7-8 बच्चियां ऐसी थी जिनको दोनों में अन्तर करने में थोड़ी दिक्कत महसूस हो रही थी | बात करने के बाद पता चला की उन्होंने ये शब्द पहली बार सुनी है इसलिए याद रखने में समय लग रहा है |
इसके बाद हमने 37 वस्तुओं के नाम को फिर से बोर्ड पर लिखा और लड़कियों से कहा इन वस्तुओं को सजीव और निर्जीव में बाँटिये | कुल 35 लड़कियों में सजीव और निर्जीव वस्तुओं तक पहुँचने का आंकड़ा कुछ इस प्रकार से है:-
0 सही 0 से 10 तक सही 10 से 20 तक सही 20 से 37 तक सही

7
11

9
8

             
अगले दिन हमने उन्हें अगले दिन के अभ्यास से लिए गृहकार्य दिया | हमने उनसे कहा इस कविता में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की सहायता से आप सभी को अपनी-अपनी एक कविता बनानी है | अगले दिन जब हम गए तो सभी ने कुछ-कुछ कहानी सुनाई | इसमें से एक बच्ची पूनम की कहानी इस प्रकार है : - “मुझे ठण्ड लग रही थी और मैंने सोच लिया था की मै अब कुछ नही कर पाउगी परन्तु थोड़ी ही दूर पे आग जल रही थी , मै आग के पास जाकर खड़ी हुई और मैंने देखा की आग से निकलता धुआं उंचाई तक जा रहा है, तो मेरी समझ में आया की मै भी धुएं की तरह उंचाई तक जा सकती हूँ|

निष्कर्ष – इस कविता के द्वारा हमने पाया की 50% से भी ज्यादा बच्चियां सजीव और निर्जीव वस्तुओं का सही-सही  पहचान नहीं कर पायीं  !

जिन बच्चियों को पिछले दो दिनों सही-सही सजीव और निर्जीव वस्तुओं के बारे में समझ नहीं थी उनके लिए हमने तीसरी सेशन में इन्हे एक-एक करके समझाया, सजीव और निर्जीव वस्तु को चित्र के द्वारा बताया | फिर इनसे पूछा सजीव और निर्जीव वस्तु कौन-कौन से वस्तुएं आ सकती है ? उसके गुण बताइए | उनके द्वारा बताने पर हमें यह पुष्टि हो गयी कि वे सजीव तथा निर्जीव के बारे में समझ गयी है| उनका जवाब सही था | वो उदाहरण देने में भी समर्थ थीं | हमारे प्रयास तीन दिन के अभ्यास के बाद रंग लाया |





                                                                                                                      By,
                                                                           

Thursday, May 25, 2017

Center Visit Report : Observations by Aman







अमन प्रताप सिंह
सदस्य आई-सक्षम
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Children at Paramjeet's Learning Centre at village Kolhua


Tutor Name :Paramjeet Kumar (Kahardih, Jamui)
Agenda : Center Observation and CaMal Test.
Visit Date : 04-05-2017 (Thursday) , Time : 03:55 to 06:00
Visitor : Aman Pratap Singh and Bipin Kumar Mishra


आज केंद्र परीक्षण का दिन तय था, मैं और बिपिन जी अपने ऑफिस से करीब 03:30 में कोल्हुआ के लिए प्रस्थान किये | परमजीत से हुई बात के अनुसार वो अपना ये बैच 4 बजे से पढाया करते है, हम करीब 03:55 में उनके केंद्र पर पहुँच चुके थे |
लगभग 04:10 पर परमजीत अपने शिक्षा केंद्र पर पहुंचे और केंद्र का ताला खोले, 2-3 बचे उन्हें देख तुरंत आ पहुंचे धीरे-धीरे करीब 04:20 तक सभी बच्चे केंद्र पर पहुँच गये | सभी का घर वहीँ आसपास था जो भी बच्चा अन्दर आता अपनी प्यारी आवाज में “May I Come in Sir” पूछता और परमजीत के “Comin” बोलने तक दरवाजे पर ही खड़ा रहता शिष्टाचार सभी बच्चों में पहली झलक में ही दिख रहा था | सभी एक-एक कर आते गये और केंद्र के चारो और दिवार से सटे पंक्तिबद्ध होकर बैठते चले गये शिक्षक सभी का दिशानिर्देशित कर रहे थे |
    सभी के व्यवस्थित हो जाने के उपरांत शिक्षक ने सभी से गृहकार्य (Homework) जमा करने को कहा, सभी बच्चे एक-एक कर अपना गृहकार्य शिक्षक को सौंप दिए | शिक्षक सभी बच्चों की कॉपी चेक कर रहे थे, गृह कार्य जांचने में सीनियर बच्चों की भी मदद ली जा रही थी | उसी समय शिक्षक ने 5-5 लोगों का दो ग्रुप बनाया और पहले ग्रुप को कुछ TLM Cards जिसमें A,B,C,D लिखे थे दिया और उन्हें क्रमबद्ध लगाने को कहा, सभी ने बड़े आनंदपूर्वक उसे पूरा किया | वहीँ दूसरे ग्रुप को हिंदी अक्षर वाले कार्ड दिए और उन्हें शब्द बनाने को कहा, तबतक बांकी बच्चे अपने मन से कुछ-कुछ कार्य कर रहे थे और कुछ बच्चे बैठे हुए भी थे और शिक्षक अभी गृहकार्य जाँच रहे थे | ग्रुप के कार्य पूरा करने के उपरांत फिर से एक नया ग्रुप बनाया गया जिसे अल्फाबेट (ABCD) के कार्ड दिए गये और उन्हें अपने-अपने नाम लिखने को कहा गया | ये पूरा कार्यक्रम लगभग 30 मिनट तक क्रियान्वित हुआ, उसके उपरांत |
    शिक्षक ने बच्चों से किताब के लिए पूछा, 7-8 बच्चों ने हाँथ उठाया | फिर शिक्षक ने कक्षा 3 की हिंदी किताब देने को कहा और उन्होंने “बैलगाड़ी का दाम” अध्याय निकालने को कहा | 2 बच्चों के पास किताब थी और उसमें से 1 शिक्षक ने लेली अब वो कहानी पढ़ाना शुरू कर रहे थे, बच्चे बहोत उत्साहित दिख रहे थे | “बैल-गाड़ी किस-किस ने देखा है, हाँथ उठाओ” ये पहला प्रश्न शिक्षक ने बच्चों से किया | बहोत से बच्चों ने अपना हाँथ उठाया, फिर उन्होंने एक बच्चे से पूछा “बैलगाड़ी में कौन सा जानवर होता है” उसने सही जवाब दिया शाबाशी के साथ उसे बैठने को कहा गया | कहानी पढ़ाने से पहले उसपर आधारित प्रश्न “कहानी पठन” की प्रशिक्षण में सिखाया जाता है, उसे होता देख बहोत अच्छा महसूस हो रहा था | उसके बाद शिक्षक ने बहोत तेज़ और साफ शब्दों में कहानी पढ़ाना शुरू किया और पूरी कहानी को बहोत अच्छे से बच्चों को सुनाया गया, बीच-बीच में बच्चों से प्रश्न भी किया जा रहे था | यहाँ हमारे मूल्यांकन के सत्र में बताये गये तीनो तरीके के मूल्यांकन (पढ़ाने से पहले, पढ़ाते समय, पढ़ाने के बाद) का प्रयोग शिक्षक ने मौखिक रूप में बहोत सहजता से पूरा किया सभी बच्चे भी पूरा आनंद ले रहे थे | कहानी पूरा करने के उपरांत सभी से उसपर आधारित प्रश्न पूछा गया इस प्रकार कहानी पाठन सत्र पूरा हुआ, उसके बाद सभी बच्चों से घर में पढ़ी गई कहानी के बारे में पूछा गया और एक लड़के (शिवम् कुमार, कक्षा-4)को पढ़ी कहानी सुनाने को कहा गया, उसने बिना देखे लगभग पूरी कहानी का चित्रण सटीक शब्दों में बिना रुके किया में उसे देखता ही जा रहा था, समाप्त करने पर उसका तालियों से अभिनन्दन किया गया बेहतरीन पल था ये |
       फिर हमसे कक्षा में आगे के कार्य (CaMal Test) कराने को शिक्षक ने कहा, सबसे पहले हमने अपना और अपने संस्था का परिचय दिया और आई-सक्षम के नारे भी लगवाये, सभी बच्चों से उनका परिचय भी लिया उसके बाद सभी बच्चों की क्रमांकित किया कुल 22 बच्चे थे और उन्हें अपना नंबर याद रखने को कहा | तेज़ धुप की गर्मी के कारण अन्दर बहोत तेज़ की गर्मी भी लग रही थी जैसे ही बच्चों को बाहर घुमने और हवा का आनंद लेने तथा एक-एक कर अन्दर आने को कहा सभी उत्साहित हो बाहर चले गये, ये उनके लिए भी नय अनुभव था | अब एक-एक-कर बच्चे आते गये और सभी बच्चों (22) का CaMal टेस्ट अच्छे से पूरा किया गया, उस समय शिक्षक सभी बच्चों के कॉपी में उनके लिए गृहकार्य दे रहे थे |
और उसके बाद सभी बच्चों को घर जाने की छुट्टी दे दी गई |   


नोटिस की गई कुछ अच्छी बातें :
  1. बच्चों में शिष्टाचार दिख रही थी, किसी कार्य हेतु शिक्षक से अनुमती ली जा रही थी |
  2. बच्चों के साथ ग्रुप कार्य कराया जा रहा था |
  3. गृह कार्य जांचने में एकदूसरे भी कार्य कर रहे थे |
  4. बच्चों की गलती करने पर शिक्षक सही निर्देशन बड़े प्यार से कर रहे थे |
  5. बच्चों को अच्छे तरीके से कहानी पढाया जा रहा था |
  6. बच्चों के मुल्यांक पर धयान दिया जा रहा था |
  7. ट्रेनिंग में बताये गये बातों जैसे : TLM, कहानी पढ़ाने के तरीके, मूल्यांकन के तीनो तरीको का इस्तमाल हो रहा था |
  8. बच्चे शिक्षक से बेहिचक अपनी बात कह या पूछ रहे थे |

मेरे अनुसार दी जा सकने वाली प्रतिक्रिया (Feedback) :
  1. बोर्ड का इस्तमाल करना |
  2. उपस्थिति पंजी का इस्तमाल करना |
  3. अन्दर बहोत तेज़ गर्मी होने के कारण बच्चे परेसान रहते है, उसका कुछ इंतजाम करना|











Friday, May 19, 2017

समय : Session on time at KGBV Jamui

       समय 

by Ekta


समय से लड़कर अपना नसीब बदल दे,
इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे |
कल क्या होगा उसकी कभी ना सोचो,
क्या पता कल समय खुद अपनी लकीर बदल दे|



समय! समय तो हर किसी के जीवन में महत्व रखता है किन्तु विधार्थी जीवन में समय का बड़ा ही महत्व होता है | समय के इसी पावन महत्व को समझाने के लिए मैंने उन्हीं की कक्षा 7 की कविता समय का चुनाव किया, जिसमे बहुत ही सुंदर ढंग से सुरों में तथा सरल शब्दों में समय के महत्व के बारे में बताया गया है|
इस कविता का चुनाव मैंने इसलिए किया क्योंकि इसके अधिकांश शब्दों से छात्राएं परिचित थीं| इस कविता में एक जैसे उच्चारण वाले शब्द बार-बार आ रहे थे, जिससे मुझे इन शब्दों का उच्चारण करवाने के साथ-साथ इन्हें दोहराने और लिखवाने में भी आसानी हो रही थी और छात्राएं भी आसानी से समझ पा रही थीं|

मैंने कक्षा को रोमांचक बनाने के लिए सबसे पहले बोर्ड पर एक घड़ी बनाई और उनसे पूछा कि क्या किसी को पता है आज हम क्या पढ़ने वाले है?

एक बच्ची ने बहुत उल्लास के साथ बताया की हम आज घड़ी के बारे में पढ़ने वाले है और सभी बच्चियों का दिमाग इसी पर केन्द्रित हो गया| किसी ने भी समय का जिक्र नहीं किया तो मैंने सवाल पूछ कर थोड़ी-सी उनकी सहायता की| मेरा सवाल था- हम घड़ी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? जवाब आया, समय देखते हैं| फिर मैंने सवाल किया कस्तूरबा में समय पर क्या-क्या करते है? इसका उत्तर हमें हर विद्यार्थी ने कुछ न कुछ कहा| जैसे- किसी ने कहा "समय पर उठते हैं", "समय पर योग करते हैं", "समय पर स्कूल जाते हैं", "खाना खाते हैं", "पढाई करते हैं", "खेलते हैं" और फिर "सोते भी हैं समय पर"| एक ने कहा दीदी समय पर हम परीक्षा भी देते हैं| इसके बाद सभी बच्चियों ने अंदाजा लगा लिया की आज “हम समय के महत्व” के बारे में पढ़ने जा रहे हैं|
               
कविता को मनोरंजक बनाने के लिए मैंने इसे लय में गाना शुरू किया| मेरे गाने के बाद दुबारा हमलोग साथ-साथ किताब में लिखे शब्दों पर अंगुली फेरते हुए गाने लगे| इस प्रक्रिया को 3 से 4 बार दोहराने के बाद सभी बच्चियां कुछ लाइने खुद से बिना किताब देखे गुनगुनाने लगीं|

इनसे जुडी कुछ अन्य एक्टिविटी:
मौखिक सवाल: इस कविता में मैंने अलग-अलग तरह के क्रियाकलाप को सामिल करने का प्रयास किया| मैंने उन्हें समूह में बाँट दिया और सभी के लिए एक सवाल था- आपलोगों को इस कविता से क्या समझ में आया? सामूहिक उत्तर से सभी ग्रुप से मिल गया पर जब सब से एक-एक करके पूछा तो केवल काजल, प्रिया और कविता ने उत्तर दिया| मेरे फिर से समझाने के बाद भी मुझे तीन बच्चियों से कोई उत्तर नहीं मिला|
             
स्मरणशक्ति से लिखना: फिर मैंने कहा अपनी स्मरणशक्ति से कविता में आये शब्दों को लिखें | इस क्रिया में 17 बच्चियों में से 3 ने सही-सही लिखा, 10 बच्चियों ने लिखने में थोड़ी गलती की और 4 बच्चियां नहीं लिख पाई क्योंकि उन्हें लिखने में कठिनाई होती है|
                 
देखकर एक जैसा उच्चारण वाले शब्दों का चुनाव: इस अभ्यास में सभी ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया पर 4 बच्चियां ऐसे करने में असमर्थ महसूस कर रही थी| पर अच्छी बात यह रही की वो इससे मिलती-जुलते शब्द बोल पा रहीं थी|
               
शब्दों से वाक्य बनाना: इस अभ्यास में मैंने कविता में प्रयुक्त होने वाले शब्दों पर वाक्य बनाने के लिए बोला| परिणाम कुछ कारगर नजर नहीं आया, बस वही 3 लड़कियां पहले अभ्यास की तरह बेहतर कर पाई| फिर मैंने सभी को रोजाने प्रयोग होने वाली क्रियाओं को लिखने अथवा बोलने के लिए बोला जैसे;- खाना, पीना, पढ़ना, खेलना आदि| 3 बच्चियां इसमें भी 2-4 से ज्यादा नहीं बता पाई|
 
कहानी लेखन: कक्षा के अंत में मैंने बच्चियों से कहा आपलोग अपने जीवन से जुड़ी कोई सच्ची घटना लिखिए जिसमे आपको समय का महत्व समझ में आया हो| जैसे:- कभी अपने स्कूल जाने में देर कर दी हो और आपको कक्षा में जाने की अनुमति न मिली हो| हमलोग अपनी-अपनी कहानी कल कक्षा में सब से साझा करेंगे|
अगले दिन परिणाम यह निकला कि सभी ने मेरे दिए गए उदहरण को ही 2-2 पक्तियों में खत्म कर दिया| जैसे: मै समय पर नहीं उठ सकी इसलिए मै एक दिन विद्यालय नहीं जा पायी, मैं विद्यालय देर से पहुंची तो मेरे शिक्षक मुझपर बहुत गुस्सा हुए आदि |

निष्कर्ष:- यह पाठ मेरे लिए भी बहुत कारगर साबित हुआ| मुझे बच्चियों की कुछ कमियों और ढेरों खूबियों के बारे में पता चला जो मेरे आगे के अभ्यास में मददगार साबित होंगी| लगभग 75% लड़कियां इस कविता के उद्देश्य को समझने के साथ-साथ इसपर दो शब्द बोल पाई| एक जैसे शब्दों को उनके आवाज से पकड़ना काफी हद तक सभी बच्चियों को आ गया| सबसे अच्छी बात यह हुई कि मै सारी लड्कियों के बारे में जान पाई कि किस छात्रा को किस प्रकार के शब्दों में, किस प्रकार की समस्या है|                                                                          

गिनती माला से गणित की शुरुआत


By- Amar Kumar
आज मैं बहुत उत्साहित था क्योंकि caMAL टेस्ट के जरिये बच्चों के शैक्षिणिक स्तर को जानने के बाद आज मैं अपने दो दोस्तों एकता और अमन के साथ कस्तूरबा गांधी विद्यालय में बच्चो को एक नए प्रयोग के साथ गणित पढ़ाने के लिए जाने वाला था I मैं और एकता, 3 बजे दोपहर विद्यालय पहुँच गयें | अमन भी हमारे पहुँचने के 5 मिनट बाद विद्यालय पहुँच गए | दोपहर का समय था, सभी बच्चियां अपने कमरे में आराम कर रहीं थी I हमारे पहुँचने के 10 मिनट के अन्दर सभी बच्चियां कक्षा में आ गयीं और सभी ने एक साथ Good Afternoonकहते हुए हमारा अभिनंदन किया I
सबसे पहले मैंने बच्चियों को पहले से बनी हुई गिनती माला दिखाया | सभी बच्चियां इसे देखकर बहुत खुश हुई और बोला भैया ये तो माला है |” फिर मैं बोला बिल्कुल ठीक कहा, ये मोतियों की माला ही है | इसे हम गिनती माला भी कहते हैं और आज हमलोग इसी गिनती माला की मदद से गणित में कुछ मजेदार सीखेंगे I और सबसे अच्छी बात यह है की आप सभी अपने लिए अपनी गिनती माला स्वयं बनायेंगे |"
तभी सभी बच्चियों ने आश्चर्य के साथ देखते हुए कहा हम कैसे गिनती माला बनायेगे? हमें तो नहीं आता” I फिर हमने बच्चियों से 5 मिनट मांगते हुए सब बताने और दिखाने की बात कही | सभी बच्चियां खुश थीं, क्योंकि उन्हें लग रहा था की आज वे सब कुछ नया करने वालीं हैं |
अपनी कक्षा को आगे बढ़ाते हुए मैंने सभी बच्चियों को 6 की संख्या में बाँटा और उनका एक ग्रुप बना दिया | इस तरह हमारे पास 12 ग्रुप बनकर तैयार हो गया | सभी ग्रुप को हमने 1 नायलोन की रस्सी का टुकड़ा और दो रंगों की 100 से अधिक मोतियाँ दी |
फिर मैंने सभी को पहले से बना हुआ गिनती माला दिखाया और बताया की आप सभी को भी इसी प्रकार का गिनती माला बनाना है | माला की ओर दिखाते हुए हमने माला की एक जैसे रंग की मोतोयों को गिना और उन्हें समझाया की कैसे एक जैसे रंग की मोतियों को 10-10 की संख्या में सजाया गया है | आप सभी को समूह में ठीक इसी तरह से 10 मोतियाँ जो एक रंग की हो उन्हें गिनते हुए माला में पिरोना और अपने लिए एक गिनती माला बनानी है | सभी सभी बच्चियां उत्साहित होकर समूह में इस कार्य पर लग गयीं |  
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गिनती माला पर अभ्यास करती बच्चियां
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एक दूसरे को अभ्यास करते देख सीखती बच्चियां
 

माला बनते वक्त हमने देखा की हर ग्रुप में 2-3 बच्चियां सक्रिय रूप से भाग ले रही थी और बांकी की बच्चियां माला बनाने में उनकी सहायता कर रहीं थीं | जैसे हर ग्रुप में 2 बच्चियां रस्सी के दोनों छोर को पकड़ी हुए थी और उनसे अपने साथियों के द्वारा गिने हुए मोतियों को पिरोने का काम कर रहीं थी, और बांकी की बच्चियां एक रंग की मोतियों को इकठ्ठा करने में, उन्हें 5 या 10 के समूह में अलग करने में अपने साथियों की मदद कर रहीं थी | 2-3 ग्रुप में एक-दो ऐसी भी बच्चियां थी जिन्होंने अपने साथियों की मदद नहीं की | इसका कारण ये भी हो सकता है कि यह क्रियाकलाप करने में इतने लोगो की आवश्यकता नहीं पड़ी या उन्हें समझ में नहीं आ रहा हो की वे अपने ग्रुप की मदद कैसे करें या इनमे से कुछ बच्चियां ऐसी थी जिन्हें गिनती नहीं आती थी | कारण जो भी हो, इसमें अच्छी बात यह दिखी की जिन बच्चियों को ठीक से गिनना नहीं आ रहा था वे भी मोतियों को 5-5 के समूह में गिनकर अपने साथियों की मदद कर रहीं थीं |
10 से 15 मिनट के अन्दर सभी ग्रुप के पास 100 मोतियों वाली एक माला बनकर तैयार हो गयी | अपने द्वारा बनाये गए माले को देख कर उनकी ख़ुशी का ठिकाना न था | कभी वे माला अपने गले में डालती तो कभी अपने दोस्तों के गले में | उनकी माला उनके घुटनों तक लटक रही थी | फिर उन्होंने एकता को बुलाया और उनके गले में माला पहनते हुए अपनी ख़ुशी जाहिर की | यह नजारा देख कर मुझे भी बहुत ख़ुशी का अनुभव हो रहा था I
C:\Users\AMAR I-SAKSHAM\AppData\Local\Microsoft\Windows\Temporary Internet Files\Content.Word\IMG_20170512_153556.jpg C:\Users\AMAR I-SAKSHAM\AppData\Local\Microsoft\Windows\Temporary Internet Files\Content.Word\IMG_20170512_160912.jpg
अपने समूह की मदद से तैयार माला दिखाती हुई बच्चियां

माला के बन जाने के बाद मैंने अनुभव किया की बच्चियां अभी उर्जावान हैं क्यों न पिछली कक्षा में दिए गए गृहकार्य की जाँच कर लिया जाये | मैंने बच्चियों से पूछा की जिन्होंने अपना गृहकार्य पूरा कर लिया है वे अपना हाथ उठाए | 18 बच्चियों को छोड़कर सभी ने हाथ उठाया |  जब मैंने बच्चियों से गृहकार्य न करने का कारण पूछा तो उनमे से 12 बच्चियों ने बताया था कि वे बच्चियां पिछली वर्ग में शामिल नहीं थी | इनमे से कुछ बच्चियां घर चली गयीं थी तो कुछ का नया नामकरण हुआ था | शेष 6 बच्चियों में से 2 ने बताया की उनका कॉपी नहीं मिला और 4 बच्चियों ने बताया कि पिछली कक्षा में जो पढ़ाया गया था उन्हें समझ में नहीं आया था I मैंने कहा, “मै आपलोगों को फिर से बताऊंगा घबराने की कोई बात नहीं है I” गृहकार्य की जाँच करने के लिए मैंने सभी ग्रुप से कहा की हर ग्रुप से कोई एक बच्ची उठे और अपने ग्रुप की सभी बच्चियों का कॉपी जमा कर ले I सभी ग्रुप की बच्चियों ने ऐसा ही किया | कॉपी जमा हो जाने के बाद मैंने उनसे कहा कि वे सभी कॉपी को अपने बगल के ग्रुप के साथ बदल लें | फिर मैंने सभी गृह कार्य(छोटी और बड़ी संख्या की पहचान) के प्रश्नों का हल को बोर्ड पर बनाकर दिखाया बच्चियों से कहा की वे उत्तर देखकर सही गलत कर दें | इसी बीच एक सवाल जिसमे मैंने गलती से गलत चिन्ह का प्रयोग किया था उसपर एक बच्ची जिसका नाम प्रिया है खड़ी होकर बोली भैया ये सवाल आप ने तो गलत बना दिया है I” यह देख मुझे काफी ख़ुशी हुई I मैंने यह महसूस किया की बच्चियों का धीरे-धीरे अब गणित में समझ बन रहा है, क्योंकि जब मैंने बच्चियों का पहला गणित का टेस्ट लिया था तो मैंने यह पाया की गणित में इनकी समझ थोड़ी कम थी I आज प्रिया को आत्मविश्वास के साथ बोलते हुए मुझे लग रहा था की सफलता मिलनी ही है |
फिर मैंने बच्चियों से बात की कि कितनों ने कितना प्रश्न सही किया है तो मैंने पाया कि लगभग सभी बच्चियों ने अपना गृहकार्य सही बनाया था I गृह कार्य समाप्त करने के बाद मैंने बच्चियों से कहा की भैया या दीदी आप को कोई अंक या संख्या बोलेगे/बोलेगी I  आपको गिनती माला में उतनी मोतियों को गिन कर दिखाना है और साथ ही साथ उस संख्या को कार्ड की सहायता से दर्शाना है जिसमे अंक अंकित हैं I हमलोग ये भी देखेगे की कौन-सा ग्रुप  पहले करता है और कौन अंत में I सारे बच्चो में इस नई प्रतिस्पर्धा के लिये ख़ुशी की लहर दौड़ गई | सभी बच्चियां अच्छा ठीक है कहते हुए तैयार हो गयीं I
अमन आगे आये और बच्चियों को बारी-बारी से 1 से लेकर 100 तक की अलग-अलग अंक एवं संख्या बोलने लगे और बच्चियां बहुत तेजी से संख्या के बराबर मोतियाँ गिनकर और साथ में कार्ड सही क्रम में सजा कर दिखने लगीं | हमने आपस में एक नियम बनाया की एक ग्रुप में एक बच्ची को एक बार ऐसा करना है ताकि सभी बच्चियों को करने का मौका मिल सके I इस तरह जैसा हमारा अंक या संख्या बदलता वैसे ही समूह की बच्चियां बादल जाती जो मोती या कार्ड की सहायता से उस अंक या संख्या को दर्शाती थीं | इस प्रकार के अभ्यास में मैंने पाया की जीत की होर में बच्चियां अपने ग्रुप की लड़की को धीरे से कार्य करते देख खुद को रोक नहीं पाती थीं और उनके बदले वे ही गिनती करके उनके हाथ में दे कर दिखने बोलती थीं | हमारे मना करते हुए समझने पर की दूसरों को भी मौका दें, उन्होंने बहुत हद तक खुद को रोका पर जल्दबाजी साफ दिख रही थी |
मोती के माध्यम से मैंने इसी तरह बच्चियों को पहाड़ा दर्शाने के लिये कहा I सभी ग्रुप की बच्चियों ने 1-10 तक में आने वाले एक संख्या को चुना और गिनती माला एवं कार्ड की मदद से पहाड़ा दर्शाया I यहाँ मुझे और बच्चियों को थोड़ी परेशानी हुई, क्योंकि हमारे पास धागा और कार्ड को जोड़ने के लिए पिन कम पड़ गये थे इसलिये 2-3 ग्रुप को मिलकर एक ग्रुप बनाना पड़ा जिससे ग्रुप में सदस्य की संख्या अधिक बढ़ गयी I   
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पहाड़ा दर्शाती हुयीं बच्चियां
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संख्या दर्शाती हुयीं बच्चियां
गर्मी अधिक होने के कारण कुछ बच्चियाँ पानी पीने का आदेश मांगने लगी और मुझे भी काफी प्यास लग रही थी  इसलिये हमने 10 मिनट का ब्रेक लेने का निश्चय किया ताकि पानी पी लिया जाये I  
पानी पीने के बाद मैंने बच्चियों को गणित माला की मदद से पूर्व की भांति जोड़ और घटाव करवाया I सभी बच्चियां गिनती  माला की मदद से जोड़ और घटाव आसानी से कर पा रही थीं I
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जोड़ एवं घटाव पर अभ्यास करती हुयीं बच्चियां

हमने घड़ी की तरफ देखा 6 बजने वाला था और मै काफी थक गया था लेकिन बच्चो का उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही जिस कारण मै भी अपनी थकान भूल गया और बच्चियों से वापस आने का वादा किया I
क्योंकि अमन कस्तूरबा गाँधी विद्यालय पहली बार गए थे इसलिए बच्चियों ने अमन का परिचय अंग्रेजी में पूछा I उन्होंने मुझसे भी एक दो सवाल अंग्रेजी में किया | यह सब देखकर मुझे काफी ख़ुशी महसूस हो रही थी | हमारे परिचय के बाद अब बच्चियों ने पिछली कक्षा में सीखे हुए हिंदी कवितालकड़ी की काठी को action के साथ गाकर सुनाया | सभी के चेहरे पर मुस्कान थी I सभी बच्चियां हमलोगों को Bye Bye शब्द  बोलते हुये दरवाजे तक छोड़ने के लिये आई I इस प्रकार आज का दिन कस्तूरबा गाँधी में बहुत ही उम्दा रहा I